एक महीने पहले तीन दिसंबर को मोहम्मदी के स्कूल उमा देवी चिल्ड्रेन एकेडमी ने सामाजिक विज्ञान की शिक्षिका को महज दो हफ्ते की नौकरी के बाद ही स्कूल से निकाल दिया था। इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने रिपोर्ट तलब की थी। इस पर जिला प्रशासन ने जांच रिपोर्ट आयोग को भेज दी है।
लखीमपुर खीरी में ट्रांसजेंडर महिला शिक्षिका को स्कूल से निकालने के मामले में जिलास्तरीय जांच समिति ने स्कूल को क्लीन चिट दे दी है। राष्ट्रीय महिला आयोग को भेजी गई जांच रिपोर्ट में जिला प्रशासन ने दावा किया कि ट्रांसजेंडर महिला शिक्षिका के आरोप सही नहीं पाए गए। उधर, ट्रांसजेंडर महिला शिक्षिका ने स्कूल प्रबंधन व प्रशासन की नीयत पर सवाल उठाते हुए मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। शिक्षिका जेन कौशिक ने बताया कि जांच रिपोर्ट को चुनौती देने के लिये वह वकीलों की राय ले रही हैं।
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एक महीने पहले तीन दिसंबर को मोहम्मदी के स्कूल उमा देवी चिल्ड्रेन एकेडमी ने सामाजिक विज्ञान की शिक्षिका को महज दो हफ्ते की नौकरी के बाद ही स्कूल से निकाल दिया था। ट्रांसजेंडर महिला शिक्षिका जेन कौशिक ने आरोप लगाया था कि प्रबंधन ने उनसे कहा था कि उनकी ट्रांसजेंडर की पहचान उजागर नहीं होनी चाहिए। वह हकीकत छिपा नहीं सकीं, लिहाजा स्कूल ने उन्हें बाहर निकाल दिया। दिल्ली की रहने वाली शिक्षिका जेन कौशिक तीन दिसंबर को स्कूल से निकाले जाने के बाद अपने घर लौट गई थीं, जहां से उन्होंने दिल्ली महिला आयोग में इस बात की शिकायत दर्ज कराई थी।
उधर, मीडिया रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रीय महिला आयोग की सुओ मोटो सेल ने यूपी के मुख्य सचिव को नोटिस जारी करते हुए मामले में रिपोर्ट तलब की थी। मामले में जिला प्रशासन ने चार सदस्यीय जांच टीम गठित कर उसकी रिपोर्ट राष्ट्रीय महिला आयोग को भेजी है। जिसमें स्कूल की प्रिंसिपल व बच्चों के बयान के आधार पर स्कूल को क्लीन चिट देते हुए कहा कि महिला शिक्षिका के आरोप सिद्ध नहीं हुए।
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स्कूल प्रबंधन के प्रभाव में प्रशासन : जेन कौशिक
ट्रांसजेंडर महिला शिक्षिका जेन कौशिक ने जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर असंतुष्टि जताई है। उन्होंने बताया कि कि खीरी प्रशासन की जांच रिपोर्ट को राष्ट्रीय महिला आयोग ने उन्हें ई-मेल किया है। इस संबंध में उनके कमेंट मांगे गए हैं। बताया कि वह अपने वकील के साथ इस संबंध में रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। इसके बाद एनसीडब्ल्यू दोनों पक्षों को बुलाएगा और सवाल-जवाब होंगे।
उधर, बीएसए लक्ष्मीकांत पांडेय ने बताया कि डीएम महेंद्र बहादुर सिंह ने चार सदस्यीय कमेटी गठित की थी, जिसमें उनके अलावा एसडीएम मोहम्मदी पंकज श्रीवास्तव, सीओ अरविंद वर्मा और जिला समाज कल्याण अधिकारी सुधांशु शेखर शामिल थे। कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट डीेएम को सौंपी है, जिसके बाद रिपोर्ट राष्ट्रीय महिला आयोग को भेजी गई है।
स्कूल प्रबंधन ने भेजा एक करोड़ का नोटिस
ट्रांसजेंडर महिला शिक्षिका को निकाले जाने के मामले में उमा देवी चिल्ड्रेन एकेडमी ने जेन कौशिक को मानहानि का नोटिस भेजकर एक करोड़ हर्जाना मांगा था, जिसके जवाब में जेन कौशिक की तरफ से 50 पेज का लीगल नोटिस भेजा गया। जेन ने बताया कि सबूतों के साथ लीगल नोटिस भेजा गया था, जिसके जवाब में पता चला है कि स्कूल प्रबंधन नोटिस वापस ले रहा है।
जेन ने बताया कि अगर वह पढ़ाने में समर्थ नहीं थीं तो निकाले जाने से एक दिन पहले दो दिसंबर को प्रिंसिपल ने उनसे टाइम टेबल क्यों शेयर किया। इतिहास के नोट्स पर भी बिना कोई कमेंट के उनके दस्तखत हैं, जिससे साफ है कि उनकी पढ़ाई से प्रिंसिपल संतुष्ट थीं। दो हफ्तों की पढ़ाई के दौरान कभी पर्यवेक्षण नहीं किया।
इसके अलावा रिलीवमेंट लेटर भी पुलिस के हस्तक्षेप के बाद दिया। कहा कि डीसीडब्ल्यू के हस्तक्षेप के बाद पुलिस हरकत में आई थी। कहा कि वह वकीलों से सहयोग लेकर जांच रिपोर्ट को चुनौती देंगी। स्कूल के प्रबंधक सनी गुप्ता ने बताया कि वह चंडीगढ़ गए हैं। इस बारे में लौटने पर बात करेंगे।