कोतवाली का निरीक्षण करने पहुंचे एडीजी ब्रजराज मीणा को मातहतों ने ऐसा भ्रमित किया कि वह कोतवाली की असल तस्वीर ही नहीं देख पाए। कोतवाली के जिस हिस्से पर गंदगी और बदहाली का राज था, उन्होंने एडीजी को उस ओर मुड़ने ही नहीं दिया। दरअसल एडीजी जब कोतवाली के मुख्य द्वार से अंदर घुसे तो मातहत अफसर कुछ यूं खड़े मिले कि एडीजी का रुख खुद ब खुद कोतवाली के दफ्तर की ओर मुड़ गए। यहां एडीजी का ध्यान उन बीट चार्ट की तरफ गया तो स्टाफ के हिसाब से अपडेट नहीं थे। हिस्ट्रीशीटरों के नाम और पते थे पर उनकी निगरानी से संबंधित कोई जानकारी नहीं थी। इस पर वह सीओ और इंस्पेक्टर पर नाराज हुए। कार्यालय का निरीक्षण करके निकले तो मातहतों ने कोतवाल के कमरे की ओर इशारा किया तो वह उधर ही बढ़ गए। कोतवाल के कमरे में ही बैठकर उन्होंने निरीक्षण की बाकी औपचारिकता पूरी कीं। इसके बाद जाते वक्त सीओ फर्स्ट कुलदीप को हिदायत देते गए कि नंबर वन बनना है तो नंबर वन की तरह काम करो। कोतवाली का जो हिस्सा एडीजी के निरीक्षण से बचा रह गया, उसकी तस्वीरें हम अपने पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं।