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Gaurav Diwas: अमर उजाला के शानदार 75 साल..., समर्पण को समर्पित जश्न

Wed, 19 Apr 2023 08:30 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाल ब्यूरो, बरेली

सार

बरेली में अमर उजाला की स्थापना के 75 वर्ष पूर्ण होने पर मंगलवार को कार्यालय परिसर में त्योहार जैसा माहौल रहा। इस खास मौके पर बरेली यूनिट की स्थापना के समय से जुड़े वरिष्ठ साथियों और वर्तमान में कार्यरत सभी साथियों ने अपने अनुभव साझा किए। 
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बरेली में अमर उजाला के निदेशक वरुण माहेश्वरी ने स्वर्णिम शताब्दी वर्ष के लोगो का अनावरण किया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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75 वर्ष का उत्सव मना रहे अमर उजाला परिसर को मंगलवार को दुल्हन की तरह सजाया गया। सुबह 10 बजे अमर उजाला के निदेशक वरुण माहेश्वरी ने संस्थान के सदस्यों के साथ हवन-पूजन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। अपराह्न तीन बजे अमर उजाला में कार्यरत सभी के परिजन बच्चों के साथ कार्यालय पहुंचे। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद संस्थान में कार्यरत साथियों के परिजन न्यूजरूम में पहुंचे। यहां संपादक नीरज तिवारी ने उन्हें खबरें लिखे जाने से लेकर छापने तक की प्रक्रिया को समझाया। इसके बाद सभी ने मशीन रूम में अखबार छपने की पूरी प्रक्रिया देखी। यहां से सभी कार्यक्रम स्थल पहुंचे। 

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प्रांजल शर्मा ने बांसुरी की धुन से सबको लुभाया। इसके बाद पांच बजे अमर उजाला के निदेशक वरुण माहेश्वरी के साथ अशोक वैश्य, प्रभात सिंह, प्रकाश चंद्र भट्ट, शरद मौर्या, मंगली राम ने केक काटा। मौजूद सभी ने तालियां बजाते हुए जश्न के माहौल में चार चांद लगा दिए। तबलावादक पहाड़ी ब्रदर्स सिद्वार्थ नेगी की टीम ने शानदार प्रस्तुति दी। इस मौके पर राकेश मथुरिया, कुलदीप दीपक, ओपी राठौर, हरदयाल मौर्या, परवेज मुती खान, रतन, प्रमोद माहेश्वरी, जय प्रकाश समेत अन्य मौजूद रहे। अल्पाहार के बाद शाम सात बजे कार्यक्रम का समापन हुआ।

अनगिनत लोगों के बेहिसाब समर्पण से बना अमर उजाला
अमर उजाला के निदेशक वरुण माहेश्वरी ने कहा कि 1948 में बोया गया बीज आज विशाल वटवृक्ष बन चुका है। जितनी बड़ी इसकी शाखाएं हैं, उतनी ही मजबूत इसकी बुनियाद है। हमारी इस 75 वर्ष की यात्रा में पुराने जुड़े साथियों को देखता हूं, उनके अनुभव सुनता हूं, तो भावुक भी हो जाता हूं और गर्व से भर जाता हूं। आज इस कार्यक्रम में अमर उजाला से जुड़े लोगों के परिजन भी आए हैं। उन्हें भी धन्यवाद देता हूं क्योंकि उनके समर्पण के बिना यह यात्रा इतनी सुखद नहीं हो सकती थी। 

आप सभी ने हमेशा खुद से आगे संस्थान को वरीयता पर रखा। अमर उजाला के मूल्य और उसकी सभ्यता आपसे ही आई है। मुझे खुशी है कि आज की नई पीढ़ी उसे आगे लेकर चल रही है। नए साथियों से कहना चाहूंगा कि जो विरासत और जिम्मेदारी हमें मिली है, इसमें हमारे सभी पूर्वजों के एक-एक पल के योगदान को हमें समझना होगा। अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए जो अपेक्षित है, उसे पूरा करना होगा। धन्यवाद, शुभकामनाएं। 

डॉ. अशोक वैश्य ने बताया कि अमर उजाला ने कहा कि आओ काम करें, यह देखकर लगता है कि परिवार का सदस्य किसी काम को करने के लिए कह रहा हो। जब भी जरूरत पड़ी तो संस्थान ने अपने की तरह हर तरफ से मदद की। यही बात सभी को जोड़े रखी है। 

कुल्दीप दीपक ने बताया कि 1988 से अमर उजाला से जुड़ा हूं। अब तो अमर उजाला घर जैसा लगता है। 75 वर्ष पूरे हो गए और पता भी नहीं चला। इस आयोजन में कई पूराने साथी कई सालों बाद मिले। उनके साथ अखबार को लेकर ढेरों बातें हुईं और बहुत अच्छा लगा। 
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सुरेंद्र कुमार खंडेलवाल ने बताया कि अमर उजाला से जब जुड़ा था तो पता नहीं था कि साथ में 32 साल का सफर तय हो जाएगा। पहले काम किया और अब समय के साथ अखबार को बढ़ते हुए देख रहा हूं। मुझे खुशी है कि मैं अमर उजाला का एक हिस्सा हूं और आगे भी रहूंगा। 

राकेश मथुरिया ने बताया कि अमर उजाला के साथ एक अलग सा लगाव है। 50 साल हो गए और लगता है जैसे कल ही की बात हो। यहां से जो सम्मान मिला वह अनमोल है। सेवामुक्त होने बाद भी हर आयोजन में अमर उजाला मुझे याद करता है यह बात और कही नहीं हैं।
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