बरेली। श्री हरि मंदिर में चल रहे आनंद उत्सव के दूसरे दिन गोकुल रमण रेती धाम से आए पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर गुरु शरणानंद ने प्रसन्नता के विभिन्न रूपों और सुख की अनुभूति के बारे में श्रद्धालुओं को जानकारी दी। कहा, कोई जब तारीफ या निंदा करे तो शांत रहना चाहिए। एक से सुख और दूसरे से क्रोध आता है। उन्होंने बताया कि इन अनुभूतियों के जागृत होते ही व्यक्ति प्रभु से दूर हो जाता है। बताया कि प्रत्येक व्यक्ति दुख से दूर रहना चाहता है यानी सच्चे सुख की तलाश करता है। इसके लिए वह भौतिक साधनों में रमता जाता है और आखिर में कष्ट के साथ उसका अंत होता है। इसलिए व्यक्ति को प्रत्येक परिस्थिति में शांत रहते हुए समय की गति के साथ प्रवाहमान होना चाहिए। ईश्वर अंश जीव अविनाशी सूत्र वाक्य को कहकर उन्होंने सत्संग का विश्राम किया। यहां अध्यक्ष सतीश खट्टर समेत रवि छाबड़ा, सुशील कुमार, युधिष्ठिर मलिक, रमेश खनीजो आदि मौजूद रहे। इससे पहले वे रामपुर गार्डन स्थित आनंद आश्रम में आयोजित सत्संग में श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देने पहुंचे। यहां महामंडलेश्वर का फूल माला से स्वागत किया गया। जानकारी मंत्री सुभाष अग्रवाल ने दी।