बरेली। बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) ग्रेटर बरेली बसाने के लिए अपना खजाना खाली करेगा। किसानों को जमीन के बदले 1200 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। बीडीए के खजाने में 500 करोड़ रुपये हैं। बाकी पैसे के बंदोबस्त के लिए बीडीए जुट गया है। बीडीए का दावा है कि ग्रेटर बरेली योजना के जरिए बीडीए दो हजार करोड़ से अधिक कमाएगा।
रामगंगानगर आवासीय योजना का शुभारंभ वर्ष 2002 में हुआ था लेकिन योजना एक दशक में आगे नहीं बढ़ पाई। वर्ष 2019 के बाद योजना ने गति पकड़ी। यहां चार से पांच सेक्टरों के प्लाटों की बिक्री की गई और अच्छी आय की गई। इससे बीडीए का खजाना भर गया। अब इस योजना पर लगभग पूरा काम हो गया। इसी के विस्तार के लिए ग्रेटर बरेली कॉलोनी बसाई जाएगी। इसके लिए बीडीए ने पूरा प्लान तैयार कर लिया है। इसके लिए बीडीए की टीम ने संबंधित गांवों में दौरा किया। किसानों से संपर्क भी साधा। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद ही इस योजना को धरातल पर उतारने की तैयारियां हुईं।
बैनामा होते ही किसानों को मिलेगा चेक
सात गांवों की 225 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होगा। यह गांव कचौली, डोहरिया, मोहनपुर, नवदिया झादा समेत सात गांव शामिल हैं। इन गांवों के लगभग आठ सौ किसानों की यह जमीन है। बीडीए के मुताबिक अब तक 65 फीसदी से अधिक किसानों ने अपनी जमीन देने के लिए सहमति पत्र भर दिए हैं। अब बैनामे की प्रक्रिया दिवाली के बाद शुरू होगी। जैसे ही किसान बैनामा करेंगे उन्हें तुरंत ही चेक दिए जाएंगे। सर्किल रेट से चार गुना इसका भुगतान होगा।
35 लाख आई नल व बोरिंग की लागत
बीडीए जमीन अधिग्रहण के नियमों के तहत ही इन गांवों में सामाजिक व आर्थिक सर्वेक्षण भी करवा रहा है। इस कॉलोनी के बनने से क्या लाभ मिलेंगे, यह सभी सर्वे में आएगा। इसी के साथ किसानों की ओर से खेतों में लगाए गए नल, बोरिंग आदि पर खर्च की गई रकम का आकलन भी किया गया है। लगभग 35 लाख इन सभी पर खर्च किए गए हैं।
रामगंगा आवासीय योजना के जरिए जो भी रकम आई है वह पूरी ग्रेटर बरेली कॉलोनी पर खर्च होगी। बैनामे की प्रक्रिया दिवाली के बाद शुरू होगी।
आशु मित्तल, एक्सईएन, बीडीए