फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आशा ने दिया ध्यान तो बची आसमां की जान

विज्ञापन
विज्ञापन
बदायूं। कभी-कभी किसी की सूझबूझ लोगों की जान बचा लेती है। अगर आशा ने ध्यान नहीं दिया होता तो म्याऊ क्षेत्र के ग्राम चितरी निवासी आसमां बेगम पत्नी गुलजार को बचाना मुश्किल था। दरअसल उसका पति दिल्ली में मेहनत मजदूरी करता है। उसके दो छोटे छोटे बच्चे हैं। आसमां गर्भ से थी। क्षेत्र में एएनएम के न पहुंचने से प्रसव पूर्व जानकारियों से अनभिज्ञ रही। इससे वह एनीमिया की शिकार हो गई और उसके हाथ पैर सूज गए। आशा संगिनी मेंटर सविता सक्सेना और आशा कार्यकर्ता मीरा देवी ने उसकी हालत देखी तो उसकी जांचें कराईं। उसमें खून की कमीं बताई गई। सात माह के गर्भ पर आसमां को लेवर पेन शुरू हो गया। इस पर उसे बुधवार को एंबुलेंस से महिला अस्पताल ले जाया गया, जहां सीएमएस रेखा रानी से बात कर खून का इंतजाम कराया गया, तब जाकर उसकी जान बचाई जा सकी। उसकी डिलीवरी हो गई। अब आसमां और उसका बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें