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आवारा कुत्तों का आतंक: इस जिले में रोजाना तीन सौ लोगों को बना रहे निशाना, डराने वाले हैं आंकड़े

Wed, 06 Mar 2024 01:38 PM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बरेली शहर के 80 वार्डों में 30 हजार से अधिक आवारा कुत्ते हैं। नगर निगम के पास कुत्तों को पकड़ने और उनको बधिया करने का सिस्टम है लेकिन संख्या के हिसाब से ये इंतजाम नाकाफी हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में रोज तीन सौ लोगों को कुत्ते काट रहे हैं।
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आवारा कुत्ते - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली में स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में रोज तीन सौ लोगों को कुत्ते काट रहे हैं। लिहाजा, एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने वालों की ओपीडी में कतार लग रही है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार बीते वर्ष जनवरी में 6,931 लोगों को कुत्तों ने काटा था। यह आंकड़ा जनवरी 2024 में 9,624 जा पहुंचा। 

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प्रतिमाह कुत्तों का हमला बढ़ता रहा। सामान्य तौर पर कुत्ते नवंबर से लेकर जनवरी तक काटते हैं पर अबकी वर्ष यह तर्क खरा नहीं उतर रहा। आईडीएसपी इंचार्ज डॉ. मीसम अब्बास के मुताबिक कुत्तों के बढ़ते हमलों की कोई स्पष्ट वजह नहीं है।

रात में वाहनों को दौड़ाते हैं 
डॉ. अब्बास के मुताबिक वैक्सीन लगवाने वाले ज्यादातर लोग देर शाम या रात में ही कुत्तों के हमले का शिकार होते हैं। दिन के सापेक्ष कुत्ते रात में ज्यादा हमला करते हैं। आशंका जताई कि वाहनों के गुजरने से उनकी जैविक घड़ी प्रभावित होती है। भय, चिंता या बीमारी की वजह से भी रात में वाहन चालकों को दौड़ाते हैं।

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वर्ष 2023 में एआरवी के आंकड़े 
माह       रैबीज टीकाकरण
जून             6931
जुलाई          6008
अगस्त     4625
सितंबर     6412
अक्तूबर     6017
नवंबर     7029
दिसंबर     8972

भूख और मांसाहार भी हमलावर होने की वजह
आईवीआरआई रेफरल पॉली क्लीनिक के इंचार्ज डॉ. अमरपाल सिंह के मुताबिक कुत्ते तभी आक्रामक होते हैं, जब वह लंबे समय से भूखे हों या उन्हें कोई तकलीफ हो। साथ ही, पर्यावरण में स्थिरता न होने से मानसिक तनाव बढ़ने की भी आशंका जताई। बताया कि पहले कुत्ते हमला कर छोड़ देते थे पर अब नोंचकर मार डालते हैं। यह हादसे उन इलाकों में या रास्तों पर ज्यादा होते हैं, जहां मांस की दुकानें होती हैं।

शहर में 30 हजार से अधिक आवारा कुत्ते
शहर के 80 वार्डों में 30 हजार से अधिक आवारा कुत्ते हैं। नगर निगम के पास कुत्तों को पकड़ने और उनको बधिया करने का सिस्टम है पर संख्या के हिसाब से ये इंतजाम नाकाफी हैं। नतीजा, जहां मौका मिलता है, कुत्ते लोगों पर हमला करते रहते हैं। लोगों के पास एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। नगर निगम की बोर्ड बैठक में कई बार यह मुद्दा उठ चुका है। पार्षदों ने तो यहां तक कह दिया था कि कुत्ते कागज में पकड़े जा रहे हैं।  

पांच हजार पालतू हैं... रिकॉर्ड में सिर्फ 120
शहर में पांच हजार से ज्यादा पालतू कुत्ते हैं पर निगम के रिकॉर्ड में यह संख्या महज 120 ही है। मात्र 10 रुपये सालाना देकर निगम में कुत्ते का रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं, लेकिन न तो लोग जागरूकता दिखाते हैं, न ही निगम की ओर से इस पर कभी कोई कार्रवाई की जाती है। मुख्य पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी आदित्य तिवारी ने बताया कि जागरूकता की कमी की वजह से पंजीकरण कम हैं। समय-समय पर जागरूकता शिविर लगाए जाते हैं।
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एक साल में 2,400 कुत्ते पकड़े गए, बधियाकरण हुआ 
सालभर में 2,400 कुत्ते पकड़े गए। नगर निगम के पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. आदित्य तिवारी ने बताया कि प्रत्येक कार्यदिवस में औसतन 10 कुत्ते पकड़े जाते हैं। अप्रैल 2023 से पांच मार्च 2024 तक 2,400 कुत्ते पकड़े गए और बधियाकरण हुआ।

आपको दिक्कत है तो करें कॉल
अगर आपके गली-मोहल्ले में आवारा कुत्ते हैं तो 7055519637 पर कॉल कीजिए। नगर निगम की ओर से कुत्तों को पकड़ने के लिए टीम भेजी जाएगी।
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