बरेली। गांव-गली तक निगरानी, लैंगिक अपराधों पर नकेल कसने और पुलिस नेटवर्क को और मजबूत बनाने के लिए एसएसपी ने अनूठा प्रयोग किया है। जिले की 22 फीसदी बीट को महिलाकर्मियों के हवाले किया गया है। अब जिले की 1070 में से 244 महिला बीट बनाई गई हैं। ये महिला पुलिसकर्मी क्षेत्रीय लोगों से संवाद स्थापित करेंगी। नई व्यवस्था एक नवंबर से लागू कर दी जाएगी।
एसएसपी ने बताया कि हर बीट को एक विशिष्ट संख्या जनपदीय पुलिस बीट क्रमांक (जेपीबीके) व महिला जनपदीय पुलिस बीट क्रमांक (एमजेपीबीके) आवंटित किया गया है। पूरे जिले को थानावार 826 पुरुष व 244 महिला बीट में बांटा है। दोनों बीट कर्मचारियों के लिए अलग-अलग बीट बुक छपवाई गई हैं। महिला बीट का फोकस महिला और बाल अपराधों पर रहेगा। शनिवार दोपहर दो बजे से रविवार शाम छह बजे तक कर्मचारी बीट में रहकर सूचना एकत्र करेंगे। जनसंपर्क व बीट के अन्य कार्य निपटाएंगे।
सोशल पुलिसिंग : सामाजिक लोगों से जुड़ेंगे बीट सिपाही
नई बीट प्रणाली में सामाजिक स्तर पर पुलिस की छवि सुधारने के लिए काफी जोर दिया गया है। बीट आरक्षी सामाजिक लोगों से समन्वय स्थापित करेंगे। आरक्षियों को अपने क्षेत्र के ग्राम प्रधान, पार्षद, ग्राम पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्य, ग्राम चौकीदार, बीएलओ, कोटेदार, अध्यापकों, सेवानिवृत्त सैनिकों, पुजारियों और मुतवल्ली आदि से समन्वय स्थापित करना होगा। लाइसेंस और पासपोर्ट धारकों और संभ्रांत लोगों की सूची रखनी होगी। सांप्रदायिक विवादों को रजिस्टर में अंकित कराना होगा। तस्करी के अपराधों को बीट पुस्तिका में लिखना होगा। सप्ताह में तीन बार क्षेत्र में भ्रमण कर सूचनाएं जुटानी होंगी।
जनता के प्रति जिम्मेदारी बढ़ेगी
नई बीट प्रणाली में पुलिसकर्मियों को जनता के प्रति ज्यादा जिम्मेदार व जवाबदेह बनना होगा। पार्कों के कर्मचारियों से संपर्क स्थापित करना होगा। अस्पतालों और डॉक्टरों के नंबर रखने होंगे। जेल से छूटे पुराने व नए अपराधियों पर नजर रखनी होगी। लापरवाही बरतने पर बीट सिपाहियों पर कार्रवाई होगी। बेहतर काम पर उन्हें पुरस्कृत भी किया जाएगा। - अनुराग आर्य, एसएसपी
अमर उजाला ब्यूरो