बरेली। श्री हरि मंदिर में चल रही श्री राम कथा के 8वें दिन पं. ब्रजेश पाठक ने दूसरों के दोषों को देखने को अपराध बताया। कहा, दोषों को देखने से दूसरों को तो कोई हानि नहीं होती लेकिन अपना अंत:करण मलिन हो जाता है। मलिन हृदय से भक्ति नहीं होती इसलिए दूसरों के दोषों को देखने से बचने की सलाह दी। बताया कि संसार में प्रत्येक व्यक्ति में दोष और गुण दोनों हैं। जिसकी जैसी भावना होगी वह वैसा ही व्यवहार करेगा। उन्होंने दृष्टि को गुणग्राही बनाने का सुझाव दिया। कथा में अध्यक्ष सतीश खट्टर, रवि छाबड़ा, संजय आनंद, जितिन दुआ व अन्य मौजूद रहे। ब्यूरो