बरेली। जिले के 16 बाल विकास परियोजनाएं संचालित हैं। बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) के 16 पद स्वीकृत हैं। इनमें तेरह पद खाली हैं। बाल विकास कार्यक्रमों की निगरानी के नाम पर कागजी खानापूरी हो रही है। जिले के 329 आंगनबाड़ी केंद्र भी ऐसे हैं, जहां कार्यकर्ता नहीं हैं। सहायिकाओं के सहारे केंद्र संचालित हैं।
गर्भवती महिलाओं और बच्चों को पोषण देने के लिए 1975 में बाल विकास विभाग की स्थापना की गई। शहर के साथ मझगवां, क्यारा, बिथरी चैनपुर, मीरगंज, भोजीपुरा, फतेहगंज पश्चिमी, नवाबगंज, भतपुरा, भुता, फरीदपुर, बहेड़ी, दमखोदा, शेरगढ़, आलमपुर जाफराबाद, रामनगर में बाल विकास परियोजनाएं हैं। प्रत्येक परियोजना के लिए बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) की नियुक्ति होनी चाहिए। कई वर्ष से भर्ती नहीं हुई और जो सीडीपीओ सेवानिवृत्त हो गए। सुपरवाइजर को सीडीपीओ पद की जिम्मेदारी दी गई है।
1881 केंद्रों के पास नहीं है भवन, संसद में उठा था मुद्दा
जिले में 2857 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इसमें 770 के पास अपने भवन हैं। 1881 केंद्रों के पास अपने भवन नहीं हैं। प्राइमरी स्कूलों व अन्य सरकारी भवनों में केंद्र संचालित होते हैं। कुछ प्राइमरी स्कूल ऐसे हैं जहां बच्चों को बैठाने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है। इस मामले को सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने सदन में उठाया था।
एक नजर खाली पदों पर
बाल विकास विभाग में कुल पद 5647
सेवारत कर्मियों की संख्या 4841
रिक्त पद 806
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता 329
मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता 30
आंगनबाड़ी सहायिका 303
कोट-
सीडीपीओ के रिक्त पदों पर शासन से भर्ती होती है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका की भर्ती के लिए जिला स्तर पर कमेटी बन रही है। इसके बाद नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होगी। - अरुण कुमार सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी