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बाराबंकी। धान खरीद में नियम और कानून बाधा बनने लगे हैं। प्रक्रिया इतनी जटिल है कि किसान इसमें उलझ कर रह गया है। पांच दिन में किसान सरकारी नियमों से इतना ज्यादा परेशान हो गया है कि थकहार कर वह अपना धान व्यापारियों के हाथों बेचने को मजबूर हो गया है। यही कारण है कि किसान सरकारी केंद्रों की ओर रुख नहीं कर रहा है और कई सरकारी खरीद केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है।
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धान खरीद में इस बार इतने नियम बना दिए गए हैं कि किसान इन नियमों को पूरा करने में ही उलझता जा रहा है। पहला नियम पंजीकरण कराना, दूसरा नियम सत्यापन कराना, तीसरा नियम हाइब्रिड धान, चौथा नियम खतौनी पर दर्ज जोत में सिर्फ 35 प्रतिशत हाइब्रिड की खरीद और पांचवां नियम हाइब्रिड धान बीज खरीद का बिल ये नियम किसानों के लिए मुसीबत बन गए हैं। पंजीकरण कराने के बाद सत्यापन के लिए किसान तहसील के चक्कर काट रहा है। सख्त नियमों के चलते हाइब्रिड धान की बोआई कर किसान पछता रहा है जबकि व्यापारी और राइस मिल मालिक इसी का आसानी से फायदा उठा तेजी से किसानों से धान खरीद कर उसे गैरप्रांतों में भेज रहे हैं।
यही कारण है कि कई धान खरीद केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। अभी तक 63 केंद्रों में से 43 केंद्रों ही खरीद शुरू हो पाई है और महज 2500 क्विंटल धान की खरीद की जा सकी है। जिले में जिस गति से धान खरीद की अपेक्षा की जा रही थी उस गति से धान की खरीद नहीं हो रही है। वही जिम्मेदार भी शासन द्वारा बनाए गए नियमों का हवाला देकर हाथ खड़े कर रहे हैं।
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तुरंत और नकद पैसा देते हैं व्यापारी
अकबरपुर निवासी किसान शैलेंद्र वर्मा बताते हैं कि इस बार धान खरीद में इतने नियम बना दिए गए हैं कि इन नियमों को पूरा करने में ही पूरा समय निकल जा रहा है। जबकि खेती का समय है अगली फसल की बोआई करनी है ऐसे में किसानों को पैसे की आवश्यकता है। सरकारी केंद्रों पर धान बेचकर तुरंत पैसा नहीं मिल सकता है। यही कारण है कि किसान सरकारी केंद्रों की ओर रुख नहीं कर रहा है। नोहरेपुर निवासी किसान तिलकराम बताते हैं कि सरकारी नियमों में उलझने से किसान पूरी तरह से बच रहा है। यदि कोई किसान सरकारी केंद्रों पर धान बेच भी देता है तो पैसा खाते में आने में करीब एक माह लग जाता है। जबकि व्यापारी तुरंत और नकद पैसा दे रहे हैं।
दिक्कतों से उच्चाधिकारियों को कराया अवगत
धान खरीद को लेकर शासन स्तर से जो नियम बनाए गए हैं उसी के अनुसार जिले में धान की खरीद कराई जा रही है। धान लेकर आने वाले किसानों को होने वाली दिक्कतों से उच्चाधिकारियों को अवगत भी करा दिया गया है। इस संबंध में शासन स्तर से जो आदेश मिलेगा उसका पूरी तरह से अनुपालन कराया जाएगा। -रमेश कुमार, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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