हरख। कभी तंगी का साया था। पैसों की किल्लत से परिवार जूझता था। अब तस्वीर बदल चुकी है। जूट बैग बनाने के हुनर ने रुचि को पूरी तरह आत्मनिर्भर बना दिया है। हरख ब्लॉक के बलछत गांव की रहने वाली रुचि अब दूसरी महिलाओं को भी स्वरोजगार से जोड़ने की मुहिम में जुटी है।
जय भीम स्वयं सहायता समूह से जुड़ी रुचि के पति रमेश कुमार ड्राइवर हैं। ऐसे में तीन बच्चों के लालन-पालन का खर्च उठाना बेहद कठिन था। पहले वह सीजनल अबीर-गुलाल बनाती थीं। कमाई सिर्फ होली पर होती थी। बाकी समय आर्थिक तंगी बनी रहती थी। इससे निपटने के लिए उन्होंने आरसीटी सेंटर से जूट बैग बनाने का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनने की ठानी। एक जनवरी 2026 को मिले तीन लाख रुपये के ऋण से शुरू किए जूट के बैग बनाने के उनके कारोबार ने अब पूरी तरह रफ्तार पकड़ ली है। वह लखनऊ के अमीनाबाद से कच्चा माल लाती हैं।
जूट के बैगों की मांग बढ़ने से अब हर महीने करीब 12 से 15 हजार रुपये की आमदनी आसानी से हो जाती है। इससे घर की आर्थिक बदहाली भी दूर होने के साथ बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च आसानी से चल रहा है। रुचि की सफलता देख गांव की आधा दर्जन महिलाएं भी जूट बैग बनाना सीख रही हैं। जूट बैग की बढ़ती मांग से वह अपने इस कारोबार को और बड़ा करने का सपना देख रही हैं। (संवाद)