हैदरगढ़ (बाराबंकी) । वाटर सेक्टर रिस्ट्रक्चरिंग परियोजना के फेज-2 में बनी नहरों की मरम्मत के लिए विश्व बैंक बजट देकर मदद करेगा। यह भरोसा विश्व बैंक की टीम ने स्थलीय निरीक्षण व समितियों के स्वतंत्र मूल्यांकन के बाद जताया है। शारदा सहायक खंड 28 के 23 डाउन सिस्टम की करीब 650 किमी छोटी बड़ी नहरों में वाटर सेक्टर रिस्ट्रक्चरिंग परियोजना फेज-2 में करीब 126 करोड़ रुपए से कार्य हुआ था।
ब्रांच नहरों का पक्कीकरण, रजबहा व अल्पिकाओं में हेड से तय दूरी तक पक्की करण, जानवरों के पीने के लिए कैटिर स्टेप, पक्के कुलाबों आदि का निर्माण हुआ था। परियोजना का उद्देश्य किसानों तक पर्याप्त पानी पहुंचाने के साथ जल संचयन है, लेकिन अल्पिकाओं व रजबहों में टेल तक पानी नहीं पहुंचता और पटरी बहने से पानी बर्बाद हो रहा है। गोसियामऊ, शरीफाबाद समेत अन्य अल्पिकाओं की लाइनिंग में टेल की ओर ऊंचाई होने से पटरी कट जाती है। दिवनखेड़ा के पास घटिया निर्माण के चलते बीते सात साल से किसानों को सिंचाई का पानी नहीं मिल रहा है।
विश्व बैंक की तीन सदस्यीय टीम में शामिल समझना थापा, राम चंद्र जमी, एडवाइजर भरत शर्मा ने दयालगंज रेग्यूलेटर से ब्रांच नहर, कुलाबों व पोषित रजबहा व अल्पिकाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने परियोजना से निर्मित डामरीकृत सड़क के गड्ढ़े, पटरी के रेनकट, खंदक, नहरों की दुर्दशा पर नाराजगी जताई। जासेपुर प्राथमिक विद्यालय में स्वतंत्र मूल्यांकन के दौरान लोगों ने नहरों को हेड से पक्का करने तथा पुर्ननिर्माण कराने की मांग भी की।
विश्व बैंक के अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त हुई नहरों के मरम्मत के लिए अतिरिक्त बजट राशि मुहैया करवाने का भरोसा दिलाया। इस दौरान अधीक्षण अभियंता भानुप्रताप, उप कृषि निदेशक श्रवण कुमार, अधिशासी अभियंता शारदा सहायक खंड 28 नवनीत कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।