पिछली बार महिलाओं की संख्या 19 थी। डीडीसी सदस्य निर्वाचित हुईं कई महिलाओं ने पहली बार राजनीति के क्षेत्र में कदम रखा है। उनके परिवार का राजनीति से पहले कोई नाता भी नहीं रहा है।
परिसीमन के बाद जिले में जिला पंचायत सदस्य की सीटें 54 से बढ़कर 58 हुई थीं। पंचायत चुनाव के आरक्षण में डीडीसी 20 सीटें महिलाओं के कोटे में आईं।
महिलाओं ने आरक्षण की सीमा रेखा को तोड़ते हुए 26 सीटों पर कब्जा जमा लिया। इनमें कई महिलाओं का तो राजनीतिक बैक ग्राउंड रहा है लेकिन कई ऐसी हैं जिन्होंने पहले बार राजनीति के क्षेत्र में कदम रखा है।
अब ये नई जिम्मेदारी खुद उठाएंगी या इनके घर का कोई सदस्य प्रतिनिधि बनकर सारा काम करेगा ये तो वक्त बताएगा।
जिले में सबसे अधिक मतों से जीतने वाले तीन सदस्यों में दो महिलाएं हैं। इनमें मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्ष शीला सिंह करीब चार हजार से और बंकी द्वितीय से राजवंती यादव ने पांच हजार मतों से धमाकेदार जीत दर्ज की है।
हरख प्रथम से चुनाव जीतने वाली शीला सिंह लगातार दो बार जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। इस बार भी अध्यक्ष की दावेदार हैं।
पहली बार डीडीसी का चुनाव जीतने वाली विजय लक्ष्मी के पति भाकियू नेता मुकेश सिंह का राजनीति से पुराना नाता है। वह विधायक का चुनाव भी लड़ चुके हैं।
हरख से ही चुनाव जीतने वाली सावित्री देवी इससे पहले भी दो बार जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं। त्रिवेदीगंज प्रथम से चुनाव जीती शशि प्रभा के पति अंबर दो बार चुनाव लड़ चुके हैं।
देवा प्रथम से जीती मीना भी चुनाव लड़ चुकी हैं। त्रिवेदीगंज ब्लॉक प्रमुख सुनील सिंह की पत्नी को धूल चटाने वाली अनुपमा पटेल के पिता कौशल किशोर जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं।
हैदरगढ़ प्रथम से चुनाव जीतने वाली भाजपा नेत्री रानी कन्नौजिया भी राजनीति की मंझी खिलाड़ी मानी जाती हैं। पहले भी जिला पंचायत सदस्य रह चुकीं बसपा नेता जवाहर वर्मा की पत्नी कुसुम लता वर्मा ने भी इस बार जीत दर्ज की है।