- अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने मतदान को बताया जरूरी
बाराबंकी। आधी आबादी खासकर महिलाओं और बेटियों को अपनी ताकत का एहसास कराने के लिए वोट डालना चाहिए। नगर निकाय चुनाव में अधिक से अधिक मतदान के लिए नारी शक्ति को पहले मतदान फिर जलपान के नारे का पालन कर करना होगा। शुक्रवार को अमर उजाला कार्यालय में घर से लेकर विभिन्न क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाने वाली महिलाओं ने ये विचार व्यक्त किए।
शिक्षिका लीलावती ने कहा कि महिलाओं की समस्याओं का गंभीरतापूर्वक निस्तारण होना चाहिए। मतदान में महिलाएं बढ़-चढ़कर भागीदारी करें। अधिवक्ता व साहित्यकार लता श्रीवास्तव ने कहा कि जीतने के बाद प्रत्याशी मुड़कर नहीं देखते। महिलाओं को धूप-छांव की परवाह किए बिना घरों से बाहर निकलना होगा तभी समाज की सूरत बदल सकती है। कवियित्री किरन भारद्वाज ने कहा कि हमें मतदान की गरिमा को समझना चाहिए। महिलाएं जागरूक बनें और वोट भी अपनी मर्जी से डालें। समाज सेविका प्राची शुक्ला ने कहा कि ऐसे प्रत्याशी को चुनें जिसकी स्वयं की क्षमता हो।
शिक्षिका नजमुस सहर ने कहा कि जब महिलाएं हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रही हैं तो मतदान में क्यों नहीं हो सकतीं। सिर्फ पांच प्रतिशत महिलाओं को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश अपने पिता-पति से पूछकर मतदान करती हैं जो समाज के लिए खतरनाक हो सकता है। गृहिणी प्रीति श्रीवास्तव व सुधा कनौजिया ने कहा कि हर महिला 11 मई के दिन सबसे पहले मतदान करें फिर कोई दूसरा काम करें। शिक्षिका बुसरा खानम ने कहा कि महिलाओं को मतदान करने पर गर्व की अनुभूति होनी चाहिए।
उप्र महिला शिक्षक संघ की अध्यक्ष अल्का गौतम ने कहा कि वोट न डालने से महिलाओं को हर कदम पर दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। रागिनी सिंह ने कहा कि महिलाओं के बिना स्वस्थ समाज की परिकल्पना साकार होना संभव नहीं है। समाजसेवी शाइस्ता अख्तर व आलिमा ने कहा कि सीट महिला के लिए आरक्षित तो कर दी जाती है, लेकिन महिलाओं को आगे कर उनके प्रतिनिधि चुनाव लड़ते हैं। ऐसे में महिला मतदाता अपने प्रत्याशियों से दूर हो जाती हैं।