बाराबंकी। पति की मृत्यु और पारिवारिक समस्याओं के बावजूद एक विधवा ने किसान दुर्घटना बीमा पाने के लिए आठ साल तक संघर्ष किया। इसका सुखद परिणाम निकला।स्थायी लोक अदालत से महिला को न्याय मिला। अदालत ने बीमा कंपनी को 5 लाख 10 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति तथा आवेदन की तिथि से सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया है।
मामला थाना असंद्रा क्षेत्र के ग्राम पूरे दुर्जन मजरा हकामी निवासी मृतक किसान नारायण तिवारी से जुड़ा है। नारायण तिवारी की 27 सितंबर 2017 को लखनऊ जाते समय थाना गोसाईगंज क्षेत्र में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। इस संबंध में उनके पुत्र संतोष तिवारी ने अज्ञात वाहन चालक के विरुद्ध गोसाईगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पति की मौत के बाद पत्नी रानी तिवारी ने मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना के तहत क्षतिपूर्ति पाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों और बीमा कंपनी के कार्यालयों के लगातार चक्कर लगाए, लेकिन कहीं से बात नहीं बनी। जनसुनवाई में भी शिकायत दर्ज कराई तो बीमा कंपनी कार्यालय जाकर त्रुटि सुधार कर क्लेम प्राप्त करने की सलाह दी गई।
मामले ने नया मोड़ तब लिया जब रानी ने तहसीलदार रामसनेहीघाट के समक्ष जन सूचना अधिकारी को प्रार्थना पत्र दिया। वहां से अवगत कराया गया कि अभिलेखों के अनुसार मृतक की कृषक दुर्घटना बीमा से संबंधित पत्रावली कार्यालय में प्राप्त नहीं हुई है। तहसील से दो अलग-अलग भ्रामक रिपोर्ट और अपूर्ण सूचनाओं के चलते वह परेशान रहीं।इसके बाद 2 सितंबर 2021 को रानी ने अधिवक्ता के माध्यम से बीमा कंपनी को लीगल नोटिस भेजा और पुनः दुर्घटना बीमा योजना के अंतर्गत आवेदन पत्र भरकर जिलाधिकारी को प्रेषित किया। इसके बावजूद न तो न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी और न ही जिलाधिकारी कार्यालय से कोई जवाब मिला।
जब कहीं से राहत नहीं मिली तो रीना ने स्थायी लोक अदालत में याचिका दाखिल की। मामले की सुनवाई के बाद स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष सत्यवीर सिंह यादव ने याचिका को सही पाते हुए बीमा कंपनी को 5 लाख 10 हजार रुपये का भुगतान सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित करने का आदेश दिया।