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टाट पट्टी पर शिक्षा ग्रहण करेंगे नौनिहाल

Sun, 21 Jun 2015 11:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
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बाराबंकी। दस दिन बाद परिषदीय विद्यालय खुल जाएंगे, लेकिन हमेशा की तरह इस बार भी इन विद्यालयों के शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों को टाट पट्टी बिछाकर जमीन पर ही बैठना पडे़गा। क्योंकि इन विद्यालयों के बेंच की कोई व्यवस्था नहीं है। बेंच की व्यवस्था सिर्फ जूनियर विद्यालयों में ही है। विद्यालयों में बने कक्षा कक्षों में 40 से 50 बच्चों की बैठने की व्यवस्था है, लेकिन भीषण गर्मी के चलते अधिकांश बच्चे पेड़ की छांव में ही बैठकर शिक्षा ग्रहण करना ज्यादा मुनासिब समझते हैं। जिले में मौजूदा समय में प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 18 सौ और जूनियर विद्यालयों की संख्या 8 सौ के आसपास है। प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों की संख्या 2 लाख 56 हजार और जूनियर विद्यालय में बच्चों की संख्या 84 हजार के आसपास है। इन बच्चों को पढ़ाने के लिए विद्यालयों मे करीब साढे़ पांच हजार के आसपास शिक्षकों की तैनाती भी है। सूत्रों की मानें तो इन विद्यालयों में से 120 विद्यालय ऐसे हैं जिनमें शौचालय की सुविधा नहीं है। 564 विद्यालयों में शौचालय तो बने हैं, लेकिन वह प्रयोग करने के योग्य नहीं है। 170 विद्यालय ऐसे हैं जिनके हैंडपंप खराब है लेकिन दावा किया जा रहा है कि विद्यालय खुलने से पहले इन सभी हैंडपंपों को सही करा दिया जाएगा। इसके अलावा करीब 3017 में महज 1678 विद्यालय ऐसे हैं जिनमें विद्युतीकरण तो है। लेकिन बिजली के आने जाने का कोई समय नहीं है। हर साल की तरह इस बार भी प्राइमरी स्कूल के बच्चों को टाट पट्टी जमीन पर बिछाकर ही पढ़ाई करनी होगी। क्योंकि जूनियर विद्यालयों में जहां बेंच की व्यवस्था है वहीं प्राथमिक विद्यालयों में टाट पट्टी और चटाई बिछाकर ही काम चलाना होगा। यह है व्यवस्था प्राइमरी विद्यालयों के भवन में दो कमरे, एक प्रधानाध्यापक कक्ष, एक बरामद होता है। इसके अलावा जो अतिरिक्त कक्षा कक्ष बनाए जाते हैं उनकी लंबाई और चौड़ाई आठ मीटर की होती है। कक्षा में पर्याप्त जगह होने की वजह से एक कक्ष में करीब 40 से 50 बच्चे आसानी से बैठाए जा सकते हैं। विद्यालय खुलने से पहले जो कमियां है वह दूर कराने के निर्देश सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को दिए गए हैं। खराब हैंडपंपों को सही कराने का कार्य चल रहा है। विद्यालयों की मरम्मत और रंगाई पुताई के लिए पहले से ही पैसा भेजा जा चुका है। हाल ही में सर्वे कराया गया है तो कोई भी भवन ऐसा नहीं है जो जर्जर हो और जिसमें बिठाकर बच्चों को शिक्षा दी जाती हो। अधिकांश विद्यालयों में बच्चों के बैठने के लिए अतिरिक्त कक्षा कक्ष भी बने हैं। - पीएन सिंह, बीएसए
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