शुक्रवार सुबह 8:50 बजे ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक सिर्फ मरीजों की आहें सुनाई दे रही थीं। सभी चिकित्सकों के कक्ष खली पड़े थे। परचा बनाने वाला कर्मचारी भी नहीं पहुंचा था।अस्पताल में मिले भेदुवा के ज्योति, राघवेंद्र प्रताप सिंह और बडेला की शैफली ने बताया कि वे लोग करीब आठ बजे अस्पताल आ गए थे।
लगभग एक घंटे से परचा बनवाने के लिए लाइन में लगे हैं पर कर्मचारी ही नहीं आया है। पता नहीं कब परचा बनेगा और कब डॉक्टर को दिखा पाएंगे। डॉक्टरों की लेटलतीफी के बारे में जानकारी के लिए जब सीएचसी अधीक्षक डॉ. रमेश चंद्र से मिलने की कोशिश की गई तो पता चला कि वे भी अपने कक्ष में नहीं है। फोन पर बताया कि उन्होंने रात में ड्यूटी की है।
अभी नहाने के लिए आवास पर गए हैं। कुछ देर में आ जाएंगे। डॉक्टरों और कर्मचारियों के समय पर नहीं आने के प्रश्न पर बोले कि सभी को चेतावनी दी गई है। लखनऊ-अयोध्या हाईवे के बगल में संचालित इस सीएचसी की दशा किसी से छिपी नहीं है। पूर्व में राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा यहां के स्टाफ को चेतावनी दे चुके हैं।
बृहस्पतिवार को राज्य महिला आयोग की सदस्य ने तीन चिकित्सक व एक कर्मचारी को नोटिस थमाया। बावजूद इसके, व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है।
अधीक्षक सहित सात डॉक्टरों की तैनाती
सीएचसी में अधीक्षक डाॅ. रमेशचंद्र के अलावा, डॉ. अमरेश वर्मा, डॉ. अनूप सैनी, डॉ. हरिशंकर, डॉ. स्वाती श्रीवास्तव, डॉ. श्वेता श्रीवास्तव और डॉ. राइस खान की तैनाती है। इनमें से डॉ. हरिशंकर, डॉ. स्वाती श्रीवास्तव और डॉ. श्वेता श्रीवास्तव को नियमित उपस्थित के संबंध में नोटिस दिया गया था।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनीकोडर में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है
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