जिले में गेहूं खरीद के लिए 86 क्रय केंद्र बनाए गए। इनमें से किसी भी केंद्र पर अभी तक 14 दिनों में एक दाना गेहूं नहीं खरीदा गया है लेकिन वहीं दूसरी तरफ सिर्फ एक क्रय केंद्र के सहारे भारतीय खाद्य निगम ने लगभग लगभग 700 क्विंटल गेहूं की खरीद कर ली है।
जब जिले के किसी भी केंद्र पर जब अभी तक एक भी किसान गेहूं बेचने नहीं आया तो एफसीआई ने इतनी खरीद कैसे कर ली। विभागीय सूत्रों का कहना है सारा गेहूं पीडीएस का है। जिसे एफसीआई ने व्यापारियों से मिलीभगत कर खरीदा हुआ दिखाकर गोदाम में रखवा दिया।
व्यापारियों ने यह गेहूं कोटेदारों से करीब 12 सौ रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा और सरकारी रेट 1525 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से एफसीआई को दे दिया। चुनावी वर्ष में सरकार किसानों को हरसंभव सुविधा मुहैया कराने के लिए तत्पर है।
किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो इसको लेकर विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं। लेकिन भारतीय खाद्य निगम के अधिकारी यहां भी खेल कर रहे हैं। विपणन शाखा समेत जहां सात एजेंसियों ने पूरे जिले में गेहूं खरीद के लिए 86 क्रय केंद्र खोले हैं वहीं भारतीय खाद्य निगम ने महज एक क्रय केंद्र सफदरगंज मंडी में खोला है।
जिले में अभी तक किसी भी क्रय केंद्र पर एक भी दाना गेहूं नहीं खरीदा गया है। सरकार के 86 क्रय केंद्रों में से किसी पर भी कोई किसान अभी तक गेहूं बेचने नहीं पहुंचा लेकिन भारतीय खाद्य निगम के सिर्फ केंद्र पर किसान गेहूं बेचने के लिए टूट पड़े। उसने लगभ 700 क्विंटल गेहूं की खरीद कर ली।
सवाल और भ्रष्टाचार की शुरुआत यहीं पर होती है। आखिर जब किसान के गांव के बगल ही केंद्र खुला है तो वो 60 किमी चलकर मंडी में गेहूं बेचने क्यों आएगा। जबकि दोनों जगह दाम एक समान है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि सारा गेहूं सार्वजनिक वितरण प्रणाली का है। जिसे कोटेदारों ने 12 सौ रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से व्यापारियों को बेचा है।
अब वही गेहूं व्यापारियों ने 1525 रुपये प्रति क्ंिवटल के हिसाब से अधिकारियों की मिलीभगत से एफसीआई को दे दिया। मतलब एक क्विंटल गेहूं पर 325 रुपये का खेल। अब इस मुद्दे पर एफसीआई क्रय केंद्र प्रभारी कुछ भी बताने को तैयार नहीं हैं।
क्रय केद्र पर मौजूद एसबी राजन से जब इस संबंध में जानकारी की गई तो उन्होंने कहा कि जो गेहूं खरीदा गया है वह किसानों का है और इसके अभिलेख भी उनके पास हैं।
करीब 40 प्रतिशत गेहूं की फसल ही अभी खेतों से कटी है जबकि 60 प्रतिशत गेहूं खेतों में लगा हुआ है। बाजार में गेहूं हमेशा 15 अप्रैल के बाद ही आता है। अभी जो गेहूं तैयार हो रहा है किसान उसे पहले अपने खाने के लिए रखता है उसके बाद जो बचता है उसे वह मार्केट में लाता है। - डॉ. एसपी सिंह, उपकृषि निदेशक
भारतीय खाद्य निगम ने सफदरगंज मंडी में एक गेहूं क्रय केंद्र खोला है। यहां पर एसबी राजन को खरीद का जिम्मा सौंपा गया है। उन्होंने अब तक 381 क्विंटल गेहूं खरीद की है जिसे गोदाम में उतारा भी जा चुका है। इससे ज्यादा कि यदि खरीद हुई है तो इसकी जानकारी अभी उन्होंने गोदाम पर नहीं दी है। - कुलदीप सिंह, डिपो मैनेजर एफसीआई
जिले में गेहूं खरीद के लिए 87 क्रय केंद्र खोले गए हैं। बाजार में अभी गेहूं की आवक नहीं हो रही है। विपणन निरीक्षकों ने बताया कि वह किसानों से संपर्क कर रहे हैं कि वह अपना गेहूं सरकारी खरीद केंद्रों पर ही लाएं क्योंकि सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 1525 रुपया घोषित किया है। इसके बाद भी अभी तक किसी क्रय केंद्र पर गेहूं नहीं आया है। एफसीआई ने कितने किसानों से गेहूं क्रय किया है यह तो वही बता सकते हैं। अभी उन्हें कोई सूचना भी नहीं दी गई है। - प्रभाकांत द्विवेदी, जिला विपणन अधिकारी