बाराबंकी। पिछले साल से 41 हजार एमटी ज्यादा गेहूं खरीद के बाद मंगलवार से जिले में गेहूं की खरीद बंद हो गई। विभाग भले ही दावा कर रहा हो कि इस बार सीधे किसानों से गेहूं की खरीद की गई पर हकीकत इससे परे हैं। इसी वजह से दो केंद्र प्रभारियों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई। लेकिन प्रभारियों द्वारा बरती गई लापरवाही किसानों पर भारी पड़ी और वह अपनी उपज बेचने के लिए धक्के खाते रहे। इसका सबसे ज्यादा लाभ बिचौलियों ने उठाया। जिसकी वजह से किसान औने-पौने दाम पर गेहूं बेचने को मजबूर रहा।
शासन ने इस बार गेहूं खरीद का कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया था। इसके बावजूद जिले में 68 केंद्रों के माध्यम से 73 हजार 243 एमटी गेहूं की खरीद की गई। जबकि पिछले साल 32 हजार 701 एमटी गेहूं की खरीद हुई थे जो पिछले साल की अपेक्षा 41 हजार एमटी अधिक रही। विभाग का दावा है कि सीधे किसानों से खरीद हुई जिसकी वजह से जिले के करीब 16 हजार 147 किसानों को इसका सीधा लाभ मिला और किसानों द्वारा बेचे गए गेहूं का पैसा सीधे उनके खाते में भेजा गया। लेकिन हकीकत इससे इतर रही।
गेहूं खरीद केंद्रों पर इस बार किसानों से ज्यादा बिचौलिए हावी रहे। एक केंद्र प्रभारी पर बिचौलियों से खरीद की मामला पकड़ में आने के बाद जहां रामसनेहीघाट थाने में केस दर्ज कराया गया वहीं खरीद में लापरवाही पाए जाने पर एक केंद्र प्रभारी का वेतन तक रोका गया। इसके बाद भी व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और किसान अपना उत्पाद औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर रहा।
कोरोना की आड़ में खूब हुआ खेल
कोरोना की वजह से जिम्मेदार इसी संकट से जूझते रहे और वह अस्पतालों की व्यवस्था और ऑक्सीजन की आपूर्ति में फंसे रहे। इसका बिचौलियों और केंद्र प्रभारियों ने जमकर फायदा उठाया। बिचौलियों को लाभ पहुंचाने के लिए किसानों को कई-कई दिनों तक क्रय केंद्रों पर खड़ा रखा गया और यदि किसी किसान ने विरोध किया तो उसके गेहूं में खामियां बताकर उसे वापस कर दिया गया।
गेहूं खरीद भले ही मंगलवार से बंद हो गई हो। शासन ने इस बार गेहूं खरीद का कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया था। इसके बावजूद हम 73 हजार एमटी गेहूं की खरीद करने में सफल रहे जो पिछले साल की अपेक्षा 41 हजार एमटी अधिक है। इससे जिले के 16 हजार 147 किसानों को लाभ मिला और समर्थन मूल्य के तहत सीधे उनके खाते में पैसा भेजा गया।
-संतोष कुमार द्विवेदी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी