बाराबंकी। शहर में आए जलप्रलय को छह दिन बीत गए हैं। जमुरिया नाले के किनारे बसे मोहल्लों से पानी निकल गया है, लेकिन निचले इलाकों में बसे दो दर्जन मोहल्लों के सैकड़ों घरों में अभी भी पानी भरा हुआ है। नगर पालिका की ओर से जलनिकासी के लिए पंपिंग सेट चलवाए जा रहे हैं, लेकिन ड्रेनेज सिस्टम न होने से समस्या का समाधान होता नजर नहीं आ रहा है। वहीं शनिवार को हुई बारिश ने समस्या फिर बढ़ा दी है।
शहर के बड़ेल, कोठीडीह, आलापुर, दशहराबाग, खलरिया, श्रीराम कॉलोनी, श्रीरामजानकी नगर, मझिलेपुर, मकदूमपुर, शांति विहार कॉलोनी, बनवा पल्हरी, लच्छूनगर, उज्जवलनगर, वेदपुरम, मयूर विहार कॉलोनी समेत दो दर्जन मोहल्लों में छह दिन से पानी भरा हुआ है। नगर पालिका की ओर से यहां पर लोग गंदे पानी में चलकर या नाव के सहारे आने-जाने को मजबूर हैं।
नगर पालिका की ओर से करीब 24 स्थानाें पर पंपिंग सेट लगाकर पानी निकलवाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन इनमें से किसी भी मोहल्ले में जलनिकासी के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। नाले-नालियों का पानी घूम फिरकर वापस आ जाता है। वहीं नगर पालिका के समस्त अधिकारियों व कर्मचारियों का रविवार का अवकाश निरस्त कर दिया गया है और जलभराव एवं सफाई व्यवस्था को देखते हुए युद्धस्तर पर कार्य करने के निर्देश दिए हैं।
अनियोजित विकास ने ध्वस्त कीं व्यवस्थाएं
शहर में बिगड़े हालातों के पीछे जिम्मेदारों के साथ आमजन की लापरवाही उभरकर सामने आई है। शहर में हुए अनियोजित विकास ने तमाम व्यवस्थाओं को ध्वस्त कर दिया। विनियमित क्षेत्र होने के बावजूद नियमों को हाशिए पर रखकर नदी-नालों के लिए सुरक्षित भूमि पर इमारतें खड़ी की गईं और किनारों तक प्लॉटिंग की गई। खास बात तो यह है कि इतना सब कुछ होने के बाद भी अब तक किसी की कोई जिम्मेदारी तय नहीं हुई है।