नहरों से पानी नदारद, कैसे हो रोपाई
धान की नर्सरी तैयार लेकिन खेत को नहीं मिल पा रहा पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबेडकरनगर। जिले में लगभग 758 किमी. लंबाई में फैली माइनर पर सिंचाई के लिए निर्भर लगभग सवा लाख किसान मुश्किल में हैं। धान की नर्सरी लगभग तैयार है। इसकी रोपाई शीघ्र ही प्रारंभ होनी है लेकिन माइनर में पानी न होने से किसानों की चिंता बढ़ी हुई है। यहां 21 जून तक पानी आने की संभावना थी लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका।
जिले के लगभग चार लाख किसानों में से लगभग सवा लाख किसान ऐसे हैं जो सिंचाई के लिए नहर आदि पर निर्भर हैं। समूचे जनपद मेें लगभग 758 किमी. लंबाई में नहरों का जाल फैला हुआ है। 130 छोटी बड़ी नहरें हैं लेकिन तीन प्रमुख नहर हैं। इसमें टांडा मुख्य नहर, टांडा समानांतर नहर व शारदा सहायक नहर शामिल है। इनमें 21 जून तक पानी आने की संभावना थी लेकिन अब तक किसी भी नहर में पानी नहीं पहुंच सका है।
इन दिनों धान की नर्सरी लगभग पूरी तरह से तैयार है। इनकी रोपाई शीघ्र शुरू होनी है। इसके लिए किसानों ने खेत तैयार करना प्रारंभ कर दिया है। नहर में पानी न होने से खेत तैयार करने में समस्या हो रही है। साधन संपन्न किसान तो वैकल्पिक माध्यम से खेत में पानी भरकर उसे रोपाई के लिए तैयार कर रहे हैं लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर किसानों के समक्ष संकट खड़ा हो रहा है।
पानी का हो रहा इंतजार
जमुनीपुर के किसान आदर्श ने कहा क बारिश का दौर तो शुरू हुआ है लेकिन इतनी बारिश से खेत रोपाई के लिए तैयार नहीं हो सकेगा। इसके लिए खेत में पानी भरा होना चाहिए। यदि माइनर में समय से पानी आ जाए तो खेत भी तैयार हो जाएगा और रोपाई भी समय पर हो जाएगी।
बढने लगी है चिंता
कैथोलिया निवासी दिलीप वर्मा ने कहा कि 21 जून माइनर में पानी आना था। हम सभी आश्वस्त थे। इसी के अनुसार धान की रोपाई को लेकर तैयारी कर रहे थे। पानी अब तक नहीं आ सका हैै। इससे खेत तैयार करने को लेकर चिंता बढने लगी है। यदि शीघ्र ही माइनर में पानी नहीं आया या फिर पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो रोपाई में विलंब होगा जिसका प्रतिकूल प्रभाव उत्पादन पर पड़ सकता है।
तीन दिन में आएगा पानी
बाराबंकी कैनाल तक पानी पहुंच गया है। उससे आगे पानी छोडने की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में दो से तीन दिन में माइनर में पानी आ जाने की उम्मीद है।
विजय कुमार सहायक अभियंता नहर विभाग अयोध्या