गनेशपुर/रामनगर (बाराबंकी)। घाघरा नदी का पानी थम गया है। नदी का पानी थमने से कटान का खतरा और बढ़ गया है। क्योंकि जैसे-जैसे पानी कम होगा कटान वैसे-वैसे बढ़ेगी। इसको लेकर प्रशासन भी नदी के जलस्तर पर नजर रखे हुए है। वहीं एल्गिन-चरसड़ी तटबंध के निकट हो रही कटान भी रुक गई है। कटान के रुक जाने से बाढ़ खंड के अधिकारियों ने मरम्मत का कार्य और तेज कर दिया है।
घाघरा नदी का पानी खतरे के निशान 106.076 से बढ़कर 106.146 मीटर पर बह रहा है। नदी का पानी जिस गति से बढ़ रहा था वह रफ्तार कम हो गई है। सोमवार को नदी का पानी 106.146 मीटर पर जाकर ठहर गया है, लेकिन कटान का खतरा अभी भी बरकरार है। तराई के लोगों का कहना है कि नदी का पानी जैसे ही घटेगा कटान और तेज हो जाएगी। इससे एल्गिन-चरसड़ी बांध पर जो खतरा बना है वह कम नहीं हो रहा है। गनीमत इस बात की है कि इस बार बांध को बचाने के लिए एक अलग से बंधा बनाया गया है। इस बंधे के बना दिए जाने से परसावल, कमियार और नैपुरा पर जो खतरा मंडरा रहा था वह भी कम हो गया है। टिकैतनगर प्रतिनिधि के अनुसार कई परिवार बंधे से वापस गांव भी आ गए हैं। जबकि मांझारायपुर को पहले ही पूरी तरह से खाली करा दिया गया था। इन गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। वह भी अब धीरे-धीरे वापस गांव आने लगे हैं। नदी का पानी ठहर जाने की वजह से सोमवार को बाढ़ खंड के अधिकारियों ने मरम्मत का कार्य और तेज कर दिया है। इससे पहले नदी ने बंधे के जिस हिस्से को क्षतिग्रस्त किया था बोरियां डालकर और जेसीबी मशीने लगाकर उसकी मरम्मत कराई जा रही है।
घाघरा नदी का पानी ठहर गया है, लेकिन वह खतरे के निशान से अभी भी ऊपर है। बांध को बचाने के लिए एक और बांध बनाया गया है बांध का जो हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ था बाढ़ खंड के अधिकारी तेजी से उसकी मरम्मत करा रहे हैं।
- हरिकेश चौरसिया, अपर जिलाधिकारी