बाराबंकी। लखनऊ, सूरत, दिल्ली और अन्य शहरों में हुए अग्निकांडों से सबक लेने का दावा करने वाला प्रशासन एक ऑटो पार्ट्स गोदाम में लगी आग के सामने बेबस नजर आया। इस हादसे ने प्रशासन, नगर निकाय और अग्निशमन विभाग की तैयारियों की हकीकत उजागर कर दी। गोदाम में न तो आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम थे और न ही अग्निशमन विभाग की अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) ली गई थी।
सबसे चिंताजनक बात यह रही कि आग बुझाने पहुंचीं दमकल विभाग की तीनों गाड़ियों का पानी खत्म होने के बाद शहर के बीच तत्काल उपयोग के लिए कोई फायर हाइड्रेंट उपलब्ध नहीं मिला। इससे आग पर काबू पाने में काफी परेशानी हुई। पड़ताल में सामने आया कि शहर के 100 से अधिक होटल, बैंक्वेट हॉल, रेस्टोरेंट, बड़े शोरूम और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान अग्नि सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं कर रहे हैं। जिला अग्निशमन अधिकारी अनिमेष कुमार के अनुसार वी-मार्ट, एनएच-27 स्थित कई होटल-रेस्टोरेंट, होटल रॉयल रिलाइट, होटल रॉयल हेरिटेज, कलिका हवेली, हाईवे हवेली, वर्मा मार्केट के कई प्रतिष्ठान समेत अनेक बड़े भवनों में फायर एनओसी लंबित है। कई जगह अग्निशमन उपकरण खराब पड़े हैं, जबकि कई भवनों में आपातकालीन निकास भी मानकों के अनुरूप नहीं हैं।
स्थिति केवल व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं है। सिरौलीगौसपुर संयुक्त चिकित्सालय सहित कई सीएचसी और पीएचसी में भी आग से बचाव के पर्याप्त संसाधन नहीं मिले हैं।
जिला अग्निशमन अधिकारी ने संबंधित संस्थानों को पत्र भेजकर व्यवस्थाएं तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गोदाम में लगी आग उस व्यवस्था का आईना है, जो संभावित खतरे से पहले से वाकिफ होने के बावजूद कार्रवाई अक्सर किसी बड़े हादसे के बाद ही करती है।