घुंघटेर। क्षेत्र समर्दा गांव में श्रीराम कथा के तीसरे दिन बुधवार को प्रवाचक शीनू शास्त्री ने विश्वामित्र द्वारा भगवान राम के शिक्षा की कथा सुनाई। विश्वामित्र राजा दशरथ के दरबार में पहुंचते हैं। राजा दशरथ उन्हें दरबार में लाकर उचित आसन पर बिठाकर उनके पुत्रों से मुनि के चरण स्पर्श करने को कहते हैं।
महर्षि विश्वामित्र यज्ञ व संतों की रक्षा के लिए राजा दशरथ से राम लक्ष्मण को वन ले जाने के लिए कहते हैं। यह सुन राजा दशरथ व्याकुल हो जाते हैं। मुनि विश्वामित्र राजा दशरथ को सभी प्रकार से समझाते हैं और उनका संशय दूर करते हैं तब राजा दशरथ आशीर्वाद देकर राम, लक्ष्मण को मुनि विश्वामित्र को सौंप देते हैं। महर्षि विश्वामित्र ने वन में प्रभु श्री राम और लक्ष्मण को कई अस्त्र-शस्त्रों और विद्याओं की शिक्षा दी। उन्होंने उन्हें ब्रह्मास्त्र, नारायणास्त्र जैसे कई दिव्य अस्त्र दिए गए। विश्वामित्र ने राम और लक्ष्मण को अस्त्रों के संचालन, आह्वान और विसर्जन के मंत्रों का ज्ञान भी दिया।