बाराबंकी के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र देवा में आयोजित मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ्य मेले के द?
- फोटो : BARABANKI
बाराबंकी। अधिकारियों की हीलाहवाली और सुस्ती के चलते मुख्यमंत्री जनआरोग्य मेला जिले में मजाक बनता जा रहा है। रविवार को कहीं अस्पताल ही बंद मिला तो कहीं मरीजों को बाहर से दवाएं लिखी गई। मेले का जायजा लेने के लिए नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं, लेकिन रविवार को कोई भी नोडल फील्ड पर मेले का निरीक्षण करते नजर नहीं आया। इसका फायदा डॉक्टरों ने उठाया, कुछ जगह वे भी बिना सूचना के अस्पतालों से गायब नजर आए।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवा में केंद्र प्रभारी के कक्ष में ताला लटक रहा था, बगल के कमरे में डॉ. जावेद बैठे मिले। यहां पर दवा लेने आई ग्रामीण सुनीता ने बताया कि कई दिनों से बुखार से पीड़ित होने पर वह दवा लेने के लिए आई थीं। जिस पर उसे चार दवाएं बाहर से लिख दी गई। दूसरी ओर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बदोसराय में डॉ. फरहत अली, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सैदनपुर में डॉ. संतोष शुक्ला, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र त्रिलोकपुर पर डॉ. सुनील कुमार वर्मा ने मरीज देखे।
प्रभारी सीएमओ डॉ. केएनएम त्रिपाठी ने बताया कि मेले में पर्याप्त मात्रा में चिकित्सक और कर्मचारी लगाए गए थे। इसके बाद भी चिकित्सक नहीं आए और बाहर से दवाएं लिखी गई है तो इसकी जांच कराकर ऐसा करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक मुख्यमंत्री जनआरोग्य मेले का आयोजन जिले के 57 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर किया गया। इस दौरान 1999 मरीज देखे जाने का दावा किया गया। इनमें पुरुष मरीजों की संख्या 723, महिलाओं की संख्या 855 और बच्चों की संख्या 57 रही।
लेकिन मुख्यमंत्री की यह महत्वाकांक्षी योजना अब विभागीय अधिकारियों की लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। लेकिन मेले के दिन बिना सूचना के अस्पतालों से चिकित्सकों का गायब रहना आम होता जा रहा है। इनकी गैरमौजूदगी में फार्मासिस्ट मेले में आने वाले मरीजों को देखते नजर आए।