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UP: बाराबंकी की शारदा नहर फंसी डॉल्फिन व उसका बच्चा, दोनों की मौत; ग्रामीणों ने बुलाई वन विभाग की टीम

Thu, 21 May 2026 08:15 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला नेटवर्क, बाराबंकी

सार

बाराबंकी की शारदा नहर में कम पानी और भीषण गर्मी के कारण मादा गंगा डॉल्फिन और उसके शावक की मौत हो गई। वन विभाग रेस्क्यू की तैयारी कर रहा था, लेकिन दोनों ने दम तोड़ दिया। अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच में हीट स्ट्रोक और कम जलस्तर को मौत का कारण माना है।
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नहर के पास पहुंची वन विभाग की टीम। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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बड्डूपुर क्षेत्र से होकर गुजरी शारदा नहर में बृहस्पतिवार को कम पानी और भीषण गर्मी के कारण दुर्लभ मानी जाने वाली एक मादा गंगा डॉल्फिन और उसके एक साल के शावक की मौत हो गई। रेस्क्यू शुरू होने से पहले ही दोनों ने दम तोड़ दिया। मादा डॉल्फिन की उम्र करीब पांच साल है। यह पांच फीट लंबी व 50 किलो वजन की थी। जबकि शावक की उम्र करीब एक साल आंकी गई है।

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वन विभाग के अनुसार बड्डूपुर के रीवा सींवा कस्बे के पास सुबह करीब सात बजे ग्रामीणों ने शारदा नहर में एक मादा डॉल्फिन और उसके शावक को देखा। देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची।

लखनऊ से टीएसए के निदेशक व जीव विज्ञानी डॉ. शैलेंद्र सिंह को भी बुलाया गया। जांच में पाया गया कि नहर में पानी का स्तर काफी कम होकर करीब दो से तीन फीट रह गया था, जबकि डॉल्फिन के जीवित रहने के लिए कम से कम पांच से छह फीट तक पानी आवश्यक होता है। ऊपर से तेज धूप के कारण पानी का तापमान भी काफी बढ़ चुका था।
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वन विभाग ने नहर के चारों ओर घेराबंदी कर दोनों की निगरानी शुरू की और रेस्क्यू की तैयारी की जाने लगी। अधिकारियों का कहना है कि शाम के समय रेस्क्यू करना ज्यादा सुरक्षित रहता, इसलिए उसी का इंतजार किया जा रहा था। 

इसी दौरान दोपहर करीब तीन बजे मादा डॉल्फिन की हालत बिगड़ गई और वह नहर में उतराने लगी। वन विभाग की टीम जब नहर में उतरी तो वह मृत पाई गई। आधे घंटे बाद उसके शावक ने भी दम तोड़ दिया। डीएफओ आकाशदीप बधावन ने बताया कि प्रारंभिक जांच में दोनों की मौत हीट स्ट्रोक और कम पानी के कारण होना प्रतीत हो रहा है।

बढ़ते प्रदूषण व बांधों के निर्माण से खतरा

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर ने गंगा डॉल्फिन को भारत में एक लुप्तप्राय प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया है। नदियों में बढ़ते प्रदूषण, बांधों के निर्माण व शिकार के कारण मीठे पानी में रहने वाली डॉल्फिन की प्रजाति गंगा डॉल्फिन के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। पांच अक्टूबर 2009 को केंद्र सरकार ने इसको भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया था।

पहले भी कम पानी में दम तोड़ चुकी डॉल्फिन

27 अक्तूबर 2024 को भी लखनऊ और बाराबंकी के बीच शारदा कैनाल में कम पानी के बीच दुर्लभ प्रजाति की गंगा डॉल्फिन का शव पाया गया। वहीं दूसरे दिन टीएसए निदेशक डॉ. शैलेंद्र सिंह की मदद से वन विभाग ने नर डॉल्फिन को रेस्क्यू कर लिया है। डॉल्फिन चार फिट लंबी और करीब 70 किलो वजनी थी।

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