फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बाराबंकी हादसा: 'उठो पापा प्लीज...मम्मी भी बेहोश हो गई हैं', कफन से लिपटी बेटी; आठ लाशें पहुंचीं गांव

Tue, 04 Nov 2025 07:49 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला नेटवर्क, बाराबंकी

सार

बाराबंकी में भीषण सड़क हादसा हो गया। इसमें गांव के आठ लोगों की मौत हो गई। देर शाम जब शव गांव पहुंचा। बेटी पिता की लाश देखकर चीखने लगी। 

विज्ञापन
बाराबंकी हादसा - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बाराबंकी के भीषण सड़क हादसे में पति-पत्नी सहित आठ लोगों की मौत हो गई। इस दौरान छह की मौके पर व दो की इलाज के दौरान मौत हो गई। सोमवार की सुबह मौलवीगंज निवासी सराफा व्यापारी प्रदीप रस्तोगी अपने परिवार के साथ बिठूर गंगा स्नान को निकले थे। बाद में पता चला कि एक हादसा हो गया है, जिसमें दो आठ लोगों की मौत हो गई। 

विज्ञापन


मंगलवार को चार एंबुलेंस मोहम्मदपुर खाला क्षेत्र में एक के बाद एक दाखिल हुईं तो सिसकियां व सन्नाटा चीत्कार में बदल गया। दो एंबुलेंस मोहम्मदपुर खाला में तो बाकी दो खड़ेहरा व दादनपुर गांव में रुकी। इनसे जैसे ही शव उतरे परिजन लिपट पड़े। पोस्टमार्टम के बाद सील शवों में कोई पिता तो कोई पति का चेहरा देखने से पहले कांपने लगा। फिर ऐसा करुण क्रंदन दिखा कि वहां मौजूद सभी लोग रो पड़े। 

हादसे के बाद मां और बेटी का रो-रोकर बुरा हाल - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
बेहोश हो गईं पत्नी, चीखते रहे बेटे
हादसे में जान गंवाने वाले खड़ेहरा गांव के श्रीकांत चालक थे। श्रीकांत के पीछे तीन युवा पुत्र राहुल, रोहित और शिवा और पत्नी जमुना देवी हैं। राहुल का विवाह हो चुका है, जबकि एक बड़ी बेटी की शादी भी कुछ वर्ष पहले ही हुई थी। जैसे ही शव घर पहुंचा पहुंची, पत्नी जमुना देवी बेहोश हो गईं। रोहित और शिवा पिता के शव को पकड़कर चीखने लगे...उठो पापा प्लीज...मम्मी भी बेहोश हो गई हैं। देखो आपसे पूरा गांव मिलने आया है। यह देख सबकी आंखें नम हो गईं।

गुमसुम बैठे नाते-रिश्तेदार - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
परिजनों को ढांढस बंधाने वाले भी रोने लगे
मोहम्मदपुर खाला के महेंद्र मिश्रा उर्फ बालाजी (40) भी हादसे के शिकार हुए। पत्नी दुलारी देवी आंगनबाड़ी कार्यकत्री हैं, जबकि उनके दो बेटे आंचल और हर्षित अभी युवा अवस्था में हैं। महेंद्र मिश्रा कई वर्षों तक किराना दुकान चलाते रहे, लेकिन कुछ समय से प्रदीप रस्तोगी के यहां फतेहपुर आने-जाने लगे थे। शव पहुंचा तो पत्नी दुलारी बदहवास होकर गिर पड़ीं। बेटों के आंसू रात से थमने ही नहीं थे। ढांढस बंधाने वाले भी रोने लगे।

रोते परिजनों को संभालते गांव वाले - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
पिता का हाथ बंटाने वाला विष्णु नहीं रहा
मोहम्मदपुर खाला कस्बे के ही गरीब तबके से आने वाले मुन्ना अपनी तीन संतानों के साथ किसी तरह खेती-बारी करके जीवन चला रहे थे।
पत्नी सुमन और तीन बच्चे विष्णु, दुर्गेश और कार्तिक उनके परिवार में हैं। बड़ा बेटा विष्णु (15) पिता का हाथ बंटाने के लिए फतेहपुर में प्रदीप रस्तोगी की दुकान पर काम करता था। शव पहुंचा तो मुन्ना के साथ दो छोटे भाई बिलख पड़े।
विज्ञापन

हादसे में कार टूटकर क्षतिग्रस्त हो गई - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
कभी बिलखती तो कभी शून्य को निहारती पत्नी
मोहम्मदपुर खाला क्षेत्र के दादनपुर गांव निवासी बुजुर्ग इंद्र कुमार मिश्रा भी बिठूर की यात्रा में शामिल थे। महेंद्र मिश्रा से उनकी मित्रता थी। इसी नाते वे भी बिठूर चले गए थे। शव घर पहुंचा तो तीन विवाहित बेटों सुरेश व मिथलेश व तीन बेटियों का भरा पूरा परिवार बिलख पड़ा। पत्नी रेखा कभी बिलखती को कभी शून्य को निहारती।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें