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दो सौ चिकित्सक ले रहे नॉन प्रैक्टिस का भत्ता

Sat, 30 Jul 2016 11:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
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जिले में दो सौ से ज्यादा चिकित्सक तैनात हैं। यह सभी चिकित्सक नॉन प्रैक्टिस का भत्ता ले रहे हैं। इन्होंने विभाग को लिखित रूप से दे रखा है कि वे निजी प्रैक्टिस नहीं करते हैं। जबकि हकीकत इससे जुदा हैै।
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कुछ माह पूर्व सरकारी अस्पताल के निकट ही चिकित्सक को निजी प्रैक्टिस करते पकड़ा भी गया। उन्होंने निजी प्रैक्टिस को ज्यादा महत्व देते हुए उसी समय सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया।

जिले के सरकारी अस्पतालों में दो सौ से ज्यादा सरकारी डॉक्टर तैनात हैं। इनको शासन प्रतिमाह निजी प्रैक्टिस न करने का निर्धारित भत्ता दे रही है। इन चिकित्सकों ने लिखकर भी दे रखा है कि वह निजी प्रैक्टिस नहीं करते हैं। जबकि हकीकत इससे इतर है। सरकारी अस्पतालों में तैनात करीब 90 प्रतिशत चिकित्सक ऐसे हैं जो गुपचुप तरीके से निजी प्रैक्टिस कर रहे हैं।
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लेकिन कोई ठोस सबूत न होने की वजह स्वास्थ्य विभाग भी इन चिकित्सकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। यहीं नहीं जिला अस्पताल में तैनात कई चिकित्सक शहर के अंदर ही अलग-अलग स्थानों पर बैठ कर मरीजों को देख रहे हैं। लेकिन कोई लिखित शिकायत न होने की वजह से विभाग भी इनके खिलाफ कार्रवाई से हाथ खडे़ कर रहा है।

घर पर देखते मरीज
सूत्रों का कहना है कि सीएचसी पर तैनात ज्यादातर चिकित्सक अस्पताल में न बैठ कर अपने आवास पर मरीजों को देखते हैं। यहीं नहीं सरकारी अस्पतालों में तैनात यह डॉक्टर राजधानी के कई पाश इलाकों में तो अपना क्लीनिक तक चला रहे हैं। करीब एक दर्जन चिकित्सक तैनाती के बाद से गायब हैं इनमें से ज्यादातर अपना क्लीनिक चला रहे हैं। 

पकड़ते ही दिया इस्तीफा
तीन माह पूर्व सीएचसी बनीकोडर पर तैनात चिकित्सक राजेश वर्मा को निजी प्रैक्टिस करते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने पकड़ा था। लेकिन चिकित्सक ने सरकारी नौकरी से ज्यादा महत्व अपनी निजी प्रैक्टिस को दिया और उसी दिन अपने पद से इस्तीफा तक दे दिया था।

सरकारी अस्पतालों में करीब 2 सौ से ज्यादा चिकित्सक तैनात हैं और लगभग सभी नॉन प्रैक्टिस का भत्ता ले रहे हैं। कितने चिकित्सक निजी प्रैक्टिस करते हैं इसकी कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। यदि मिलती तो जांच कराकर ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 
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डॉ. सतीश चंद्रा, सीएमओ
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