बारिश व बाढ़ से बिजली उत्पादन प्रभावित होने से इसका असर जिले में दिखने लगा है। मांग के सापेक्ष तीन हजार मेगावाट बिजली कम मिलने के बावजूद भी विभाग रोस्टर के हिसाब से आपूर्ति होने का दावा कर रहा है। मांग और उपलब्धता में भारी अंतर के चलते गांवों से लेकर शहरों तक आपात कटौती का सिलसिला जारी है। पटरी से उतरी विद्युत आपूर्ति व्यवस्था विभाग के लिए चुनौती बन गई है।
जिले को 20 हजार मेगावाट बिजली की मांग के सापेक्ष 17 हजार मेगावाट बिजली मिल रही है। तीन हजार मेगावाट की कटौती होने पर रोस्टर के हिसाब से बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही है। जिससे लोगों को कॉफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
एसडीओ बाराबंकी आरके श्रीवास्तव शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे, तहसील क्षेत्र में 20 घंटे व ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे आपूर्ति होने का दावा कर रहे हैं, जबकि हकीकत इससे कहीं परे है। आपात कटौती होने से आजिज उपभोक्ता जनरेटर व इंनवर्टर का सहारा ले रहे है। ग्रामीण क्षेत्र में हालात बद से बदतर हैं।
48 घंटे में फुंके ट्रांसफार्मर बदले जाने के दावे की हकीकत सुढियामऊ क्षेत्र के सरांयगौरा गांव में दो माह से फुंका ट्रांसफार्मर बयां कर है। वहीं लोकल फाल्ट की शिकायत उपकेंद्रों पर होने की बात कहते हुए अधिकारी जानकारी न होने की बात कह रहे हैं।