बाराबंकी। परिवहन निगम ने अपनी बसों की सुरक्षा और उन पर निगरानी के लिए हर बस में जीपीएस सिस्टम लगाया और बाकायदा कंट्रोल रूम बनाकर उसकी निगरानी हो रही है। इसके बावजूद लखनऊ अयोध्या हाईवे पर बाराबंकी में रोजाना करीब 300 लंबी दूरी वाली बसें बिना रूट के ही फर्राटा भर रही हैं। एमडी और परिवहन मंत्री का सख्त निर्देश के बाद भी यह बसें बाराबंकी शहर के अंदर से न होकर बाईपास से ही गुजर जा रही हैं। इससे रोजाना 15 हजार से अधिक यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए बसें न मिल पाने के कारण परेशानी उठाना पड़ रही है।
बाराबंकी जिला मुख्यालय में करीब 15 साल पहले हाईवे रूट की सड़क शहर के अंदर से ही होकर गुजरी थी। इस दौरान सभी बसे शहर के अंदर से होकर जाती थी। लेकिन सफेदाबाद से चौपुला तक करीब 12 किलोमीटर लंबा बाईपास बनने के बाद से रोडवेज बस अब शहर के अंदर आने की जगह हाइवे से होकर बाहर से ही गुजर जाती हैं। इस पर रोक लगाने के लिए परिवहन विभाग के एमडी और मंत्री ने कई बार सख्त चेतावनी जारी कर चुके हैं। इस दौरान कई चालक व परिचालकों पर जुर्माना भी लगा लेकिन फिर भी इनकी मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही।
शहर में जगह-जगह चौराहों पर खासकर पटेल तिराहा, नाका सतरिख चौराहा, पल्हरी चौराहा, रामनगर तिराहा आदि पर दिन भर यात्री खड़े रहते हैं और बसों का इंतजार करते हैं, लेकिन बसें तब तो मिले जब इधर से आए। करीब 15000 यात्री रोज परेशान होते हैं या फिर डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। लखनऊ की ओर से आने वाली बसें सफेदाबाद सहित ओवर ब्रिज पर चढ़कर सीधा शहर के बाहर बाहर निकल जाती है। यही हाल फैजाबाद गोंडा की ओर से आने वाली बसों का है, जो चौपुला तिराहे से बाईपास होकर गुजर जाती हैं।
फेल साबित हो रहा जीपीएस सिस्टम
बस चालकों की इस मनमानी पर रोक लगाने के लिए परिवहन निगम ने सभी बसों में जीपीएस सिस्टम भी लगाया। ताकि पता चल सके कि बसें किधर से गुजर रही है लेकिन इसके बाद भी बसों का संचालन बेहतर नहीं बनाया जा सका है। जीपीएस सिस्टम भी फेल साबित हो रहा है।
शहर के अनुबंधित बस स्टेशन वाले बस स्टेशन से रोजाना 108 बसें 29 रूटों पर दौड़ती हैं, मगर कोई भी बस लखनऊ के अलावा अन्य किसी शहर को नहीं जाती। अयोध्या रोड पर शुरू किया गया अंतर जनपदीय बस स्टेशन केवल कहने भर को है क्योंकि इस बस अड्डे पर एक भी बस का ठहराव नहीं होता है। अभी तक वर्कशॉप भी अधूरा पड़ा है।
जीपीएस सिस्टम से निगरानी के लिए लखनऊ में कंट्रोल रूम बनाया गया है। हाईवे से गुजरने वाली बसों को लेकर उच्चाधिकारियों को पहले भी कई बार पत्र लिखा गया है। व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अब रेंडम जांच अभियान चलाया जाएगा।