बाराबंकी। सरयू में करीब साढ़े तीन लाख क्यूसेक पानी शारदा व गिरजा बैराज से और छोड़ा गया। अब इससे परेशानी भी बढ़ जाएगी। बुधवार की शाम को जल स्तर खतरे के निशान 106.070 मीटर के सापेक्ष 106.616 मीटर रहा। हालत ये है कि एक दर्जन गांवों में पानी भर गया है। 30 से ज्यादा गांव पानी से घिरे हैं जहां अब लोग नाव का सहारा ले रहे हैं। जिले में भी हो रही बारिश का पानी सरयू में जाने से समस्या और बढ़ सकती है।
जिन तटवर्ती गांवों में पानी भर गया है, वह लोग अपने-अपने परिजन के साथ तटबंधों व अन्य सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचने के लिए नाव का सहारा ले रहे हैं। खाद्य रसद एवं नागरिक आपूर्ति राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने भी सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र में बाढ़ प्रभावति गांवों का भ्रमण लोगों का हाल जाना और मदद का आश्वासन दिया।
सूरतगंज प्रतिनिधि के अनुसार सरयू नदी का बहाव तेज होने से हेतमापुर क्षेत्र के लगभग तेरह गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे जनजीवन प्रभावित है। बाबा पुरवा, लल्लपुरवा, बलाईपुर, सुंदरनगर, हेतमापुर, मदरहा, क्योलीपुरवा, संकटापुर, गुडियन पुरवा, केदारीपुर, कोडरी व बेलहरी गांव में हालत खराब है। इन गांवों से अब लोग बाहर आ रहे हैं। कहीं और जाकर वे छप्पर व तिरपाल रखकर आशियाना भी बना रहे हैं।
सुंदरनगर निवासी मो. आलम, गननतू, मो. अहमद, वजीद अली, आमीना सहित कई लोग जरूरी सामान लेकर सूरतगंज-हेतमापुर मार्ग के किनारे खुले में रहने को विवश हैं। इसी तरह हेतमापुर गांव के 200 परिवार प्रभावित हैं। तटबंध और संपर्क मार्गों पर अस्थायी ठिकाने बनाकर लोग किसी तरह दिन गुजरने के लिए बंधे पर बांस बल्ली बांधकर व्यवस्था करने लगे हैं।
लोग तटबंध से कुछ ही दूरी पर बने बाढ़ शरणालय में नहीं जा रहे। इनका कहना है कि साथ में पशु हैं इसलिए तटबंध ही सुरक्षित है। जबकि तटबंध पर अभी तक प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। कीचड़ व मच्छरों से लोग परेशान हैं। सुंदरनगर के आलम का परिवार हेतमापुर-सूतरगंज मार्ग पर डेरा डाल चुका है।
पुरानी नावों में भर जा रहा पानी
बाढ़ से प्रभावित सरसंडा में 10, बतनेरा में 15 और आकौना में आठ नावें लगाई गई हैं। इनमें कुछ नावें पुरानी होेने से उनमें पानी का रिसाव हो रहा है। नायब तहसीलदार तहज़ीब हैदर भी तटबंध पर मौजूद रहे।