घाघरा नदी का पानी लाल निशान पार कर गया। नदी का पानी एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगा है जिससे प्रभावित गांवों में फिर से पानी भरने लगा है। जिससे एक बार फिर यहां के लोग सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन शुरू कर दिए हैं। वहीं बंधे पर शरण लिए बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
घाघरा नदी का पानी खतरे के निशान से 67 सेमी ऊपर बह रहा है। इसके साथ ही नेपाल द्वारा लगातार छोड़े जा रहे पानी की वजह से नदी का पानी तेजी से बढ़ने लगा है। नदी के बढ़ते जलस्तर से तराई के लोग फिर सहम गए हैं। वहीं बाढ़ से प्रभावित 120 गांवों में पानी बढ़ने से लोगों में दहशत बनी हुई है।
बाढ़ का पानी सनावा, भेरीकोल, गोबरहा, तेलवारी, इटहुआ, सेमरी, सिकरी, कोठरी गौरिया, अतरसुइया, सुबेदारपुरवा, गोपी पुरवा, रानीमऊ, तराई, असवाल, लिलार, ढेमा, कठूली, रामपुर हडाहा, बांसगांव, बसंतपुर, पत्रा के अलावा सूरतगंज क्षेत्र के प्रभावित गांवों में बढ़ने लगा है। वहीं जो लोग बंधे पर बसे हुए हैं उनकी दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बाढ़ पीड़ितों में बांटी जा रही राहत सामग्री भी इनके लिए नाकाफी है।
घाघरा खतरे के निशान से अभी 67 सेमी ऊपर बह रही है। नदी का पानी लगातार बढ़ता जा रहा है जिससे पानी प्रभावित गांवों की ओर पहुंचने लगा है। बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए नावें मुहैया कराई जा रही हैं। - अनिल कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी