करीब छह लाख वाहनों वाले जिले की गति मापने का एक यंत्र तक नहीं
-श्याम यादव
बाराबंकी। तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आकर रोजाना एक व्यक्ति की जान जा रही है। हर माह 30 से अधिक मौतें हो रही हैं। लेकिन जिले से गुजरे चार हाइवे व आधा दर्जन से अधिक प्रमुख मार्गों पर रफ्तार को मापने के लिए एक यंत्र तक नहीं है। हालात इतने बदतर हैं कि दो चार जगहों पर गति सीमा के बोर्ड लगाकर इतिश्री कर ली गई है। अधिकारी भी सब जानते हैं और इसकी चर्चा सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में होती है मगर होता कुछ नहीं।
जिले से चार हाइवे गुजरे हैं। इनमें पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, लखनऊ-सुल्तानपुर हाइवे, लखनऊ-अयोध्या हाइवे व बाराबंकी-बहराइच हाइवे शामिल हैं। जबकि हैदरगढ़-बाराबंकी, रामसनेहीघाट-हैदरगढ़, बाराबंकी-देवा-फतेहपुर मार्ग जैसे आधा दर्जन से अधिक स्टेट व जिला मार्ग हैं। 24 घंटे में करीब डेढ़ लाख वाहनों का आवागमन होता है।
रोजाना तेज गति के कारण छोटे बड़े मिलाकर औसतन तीन से चार हादसे होते हैं और एक जान जाती है। परिवहन विभाग भी मानता है कि 65 फीसदी हादसे तेज रप्तार के कारण होते हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि आज तक रफ्तार पर अंकुश लगाने के इंतजाम जिले में नहीं हुए। परिवहन विभाग के पास एक यंत्र तक नहीं है तो पुलिस विभाग केवल चालान करने तक सीमित है। यही हाल एनएचएआई का है। सफेदाबाद से लेकर रामसनेहीघाट तक कई जगहों पर गति सीमा वाले बोर्ड लगाकर कोरम पूरा कर लिया गया है। संवाद
वर्जन-
वाहनों की रफ्तार इंटरसेप्टर में लगी मशीन से मापी जाती है। जिले में इंटरसेप्टर वाहन नहीं है। इसका फायदा उठाते हुए वाहन चालक लिंक मार्गों से लेकर हाईवे पर मनमानी गति से वाहन दौड़ाते हैं।
-अंकिता शुक्ला, एआरटीओ प्रशासन