बाराबंकी में सोमवार को जिला अस्पताल में समय से इलाज न मिलने पर गई महिला की जान से चििकत्सकों को दोषी ठहराते हुए रोते बिलखते परिवारीजन।
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श्वास से पीड़ित एक अधेड़ महिला को उसके परिवारीजनों ने जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सोमवार को भर्ती कराया। जहां दो घंटे के अंदर मात्र एक इंजेक्शन व ग्लूकोज लगाया गया। हालत गंभीर होने पर परिवारीजनों ने चिकित्सकों से मरीज को देखने के लिए कहा लेकिन चिकित्सक अपनी जगह से नहीं हिले। इलाज में इस कदर लापरवाही बरती गई कि महिला की मौत हो गई। परिवारीजनों ने इसका विरोध करना शुरू किया तो इमरजेंसी के कर्मचारियों ने एंबुलेंस से शव पीड़ित के घर भेजवा दिया।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सोमवार को नगर कोतवाली क्षेत्र के कांशीराम कॉलोनी निवासी पार्वती (62) को उसकी पुत्री सत्यवती ने भर्ती कराया। सत्यवती का कहना है कि उसकी मां सांस के रोग से पीड़ित थी। भर्ती के समय वहां मौजूद चिकित्सकों ने उसे एक इंजेक्शन व एक ग्लूकोज लगवा दिया और कहा अभी आधे घंटे में आराम मिल जाएगा।
महिला की हालत पल-पल गंभीर हो रही थी। इंजेक्शन कक्ष में मरीज के घरवालों के हाथ में ग्लूकोज की बोतल पकड़ा दी। कुछ देर महिला की सांसे तेज होने पर उसकी पुत्री सत्यवती डॉक्टर से अपनी मां को देखने के लिए कहा तो उसे यह कहकर भगा दिया कि अभी सूई लगी है इतनी जल्दी आराम हो जाएगा क्या।
दो घंटे बाद महिला की सांसें थम गईं। मृतका के परिवारीजनों ने इमरजेेंसी में उपचार में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया। मामला गंभीर होता देख वहां के कर्मचारियों ने एंबुलेंस में शव लादकर उसे कांशीराम कॉलोनी भिजवा दिया। मृतका की पुत्री सत्यवती ने चिकित्सकों के खिलाफ शिकायत करने की बात कही है।
मुझे इस बारे में कोई शिकायत नहीं मिली है। मामले की जांच कराई जाएगी। जो भी चिकित्सक लापरवाही करते पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. सतीशचंद्रा, सीएमओ