खरना के तहत ठेकुआ बनातीं महिलाएं।
- फोटो : खरना के तहत ठेकुआ बनातीं महिलाएं।
बाराबंकी। सोने के कलशवा में खिरिया बनउली, सोने की परात दिहली सजाय हे छठी मइया.., कबहू ना छूटी मइया हमनी से बरत तोहार.. उगी हो सूरजदेव भइल भिनसरवां... जैसे छठ मइया के गूंजते गीतों के बीच छठ पर्व की रौनक बढ़ती जा रही है। छठ महापर्व के दूसरे दिन महिलाओं ने खरना प्रसाद बनाया और सूर्यास्त होने पर पूजा अर्चना के बाद महिलाओं ने गुड़ की खीर व रोटी का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण किया।
भगवान भास्कर की उपासना व आस्था के महापर्व छठ के दूसरे दिन रविवार को घरों में चूल्हे पर ठेकुआ व चावल और गुड़ या गन्ने के रस से खीर बनाई गई। इसे शाम को पूरे परिवार के साथ प्रसाद के तौर पर ग्रहण किया गया और ठेकुआ का प्रसाद बांटा गया। इसी के साथ 36 घंटे का निर्जल उपवास शुरू हुआ, जिसका पारण मंगलवार को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद किया जाएगा।
भीनी-भीनी खुशबू से महका घर आंगन
व्रती महिलाओं ने दिन में छठ मइया के गीत गाते हुए चूल्हे में आम की लकड़ी से देशी घी में ठेकुआ बनाया तो भीनी-भीनी खुशबू से घर आंगन महक उठा। इस दौरान महिलाएं छठ मइया के गीत गाती रहीं और ठेकुआ बनाती रहीं। दूर दराज रहकर नौकरी करने वाले आए रिश्तेदारों से घरों में उत्सव सरीखा माहौल है।
छठ पूजा घाट का तहसीलदार ने लिया जायजा
कोटवाधाम। सिरौलीगौसपुर ब्लॉक और पूरेडलई ब्लॉक के 10-10 सफाईकर्मियों की टीम घाट पर सफाई में जुटी रही। इसके अलावा घाट पर आने जाने का रास्ता जेसीबी मशीन से सही किया गया। वहीं नदी में बैरिकेडिंग भी कराई जा रही है, जिससे लोग गहरे पानी की तरफ न जा सकें। घाट पर कराए जा रहे कार्यों का निरीक्षण सिरौलीगौसपुर तहसीलदार बालेंदु भूषण वर्मा ने किया। उन्होंने घाट पर प्रकाश व्यवस्था समय पर करने के साथ बचे कार्य को जल्द पूरा कराने का निर्देश दिया।