बाराबंकी। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट सं.दो असद अहमद हाशमी की अदालत ने वर्ष 2016 के थाना टिकैतनगर क्षेत्र के चर्चित हत्या और जानलेवा हमले के मामले में सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुनाया है। अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों में गंभीर विरोधाभास और संदेह से परे जुर्म साबित न कर पाने के आधार पर नामांकित चारों आरोपी मुकेश चन्द्र वर्मा, उनके पिता कौशल किशोर वर्मा, भाई रवि वर्मा तथा पत्नी मंजू वर्मा को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है।
मामले के अनुसार वादी पक्ष ने रंजिश के चलते मारपीट, घर में घुसकर हमला करने और पत्नी की हत्या का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था। हालांकि ट्रायल के दौरान चश्मदीदों व चोटिल गवाहों के बयानों में परस्पर विरोधाभास पाए जाने और स्वतंत्र साक्ष्यों के अभाव के कारण अदालत ने अभियोजन के कथानक को संदिग्ध माना और सभी को बरी कर दिया।
दुष्कर्म और छेड़छाड़ के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज :
सत्र न्यायाधीश प्रतिमा श्रीवास्तव की अदालत ने अस्पताल में साथ काम करने वाली महिला सहकर्मी से अश्लील हरकत व दुष्कर्म करने के आरोपी विकास यादव निवासी कटरा थाना जहांगीराबाद की जमानत याचिका सुनवाई के बाद खारिज कर दी है। मामला थाना मसौली का है, जहां पीड़िता ने आरोपी पर बहलाकर सुनसान जगह ले जाने और दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। अदालत ने पीड़िता के दर्ज बयानों और अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को जमानत पर रिहा करने से इन्कार कर दिया।
चोरी में दो महिला आरोपियों को मिली जमानत :
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट सं.-18) की अदालत ने थाना कोतवाली नगर से जुड़े चोरी और संदिग्ध संपत्ति मामले में निरुद्ध महिला आरोपी रेखा देवी और पुष्पा की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। बचाव पक्ष का तर्क था कि आरोपियों को रंजिश के चलते फर्जी तरीके से फंसाया गया है और उनसे कोई वास्तविक बरामदगी नहीं हुई है। अदालत ने दोनों पक्षकारों की बहस सुनने और सर्वोच्च न्यायालय के विधिक नजीरों का अनुपालन करते हुए 30-30 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र व दो-दो प्रतिभू दाखिल करने पर रिहाई का आदेश दिया।
दुष्कर्म के मुकदमे में सुनवाई पूरी :
अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या दो में थाना असन्द्रा क्षेत्र के सात साल पुराने अपहरण और दुष्कर्म के मामले में आरोपी सुभाष निवासी हाजीपुर के विरुद्ध सत्र परीक्षण के तहत सुनवाई की गई। अभियोजन की ओर से वादिनी, पीड़िता तथा अन्य गवाहों के बयान अदालत में परीक्षित कराए गए। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों व गवाहों के बयानों का अनुशीलन करते हुए अदालत मामले में अंतिम निर्णय की दिशा में आगे बढ़ रही है।
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