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Barabanki News: बेकार समझकर जलाई जाने वाली पराली की भी अब कीमत

Mon, 20 Apr 2026 02:09 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
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बाराबंकी। एक समय था जब खेतों में बची पराली किसानों के लिए बेकार समझी जाती थी। उसे जला देना ही सबसे आसान तरीका था। लेकिन बदलते दौर ने उसी पराली की कीमत तय की दी। अब यही पराली पशुओं के चारे से लेकर मशरूम उत्पादन और ईंधन तक में उपयोगी हो गई है। विडंबना देखिए कि इसी पराली को बचाने की कोशिश में एक किसान ने अपनी जान गंवा दी।
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जिले में हर साल पराली जलाने के मामलों में किसानों पर रिपोर्ट दर्ज होते रहे हैं। प्रशासनिक सख्ती और बढ़ती जागरूकता के बीच अब किसान पराली जलाने से बच रहे हैं। बल्कि वे इसे इकट्ठा कर भूसे के रूप में इस्तेमाल या बेचने लगे हैं। कंबाइन मशीनें केवल गेहूं की बालियां काटती हैं, जबकि खेत में डंठल और अवशेष खड़े रह जाते हैं।
पिछले एक साल में भूसे के दाम बढ़ने से तस्वीर बदल गई है। किसान अब इन अवशेषों को सहेजकर रखते हैं। यह पराली पशुओं के चारे के रूप में काम आती है, मशरूम उत्पादन में उपयोग होती है, गोबर के साथ मिलाकर उपले बनाए जाते हैं और ईंट भट्टों में ईंधन के रूप में भी खपती है। कई निजी कंपनियां भी इसे खरीदने लगी हैं।
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किसान हीरालाल ने कमाई के इस साधन को बचाने के लिए बिना देर किए आग बुझाने की कोशिश शुरू कर दी। लेकिन तेज लपटों ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।
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पांच लाख की मिलेगी सहायता
मामले को डीएम शशांक त्रिपाठी ने गंभीरता से लिया है और तहसील से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है। अधिकारियों के अनुसार, यह घटना किसान बीघा दुर्घटना की श्रेणी में मानी जाएगी परिवार को पांच लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
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