रेप की शिकार 13 वर्षीय बच्ची के मामले में हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी उसकी सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरती गई। शुक्रवार दोपहर किशोरी को डिस्चार्ज करने के बाद लखनऊ के अस्पताल प्रशासन ने पीड़िता को घर भेजने के लिए एंबुलेंस तक का इंतजाम नहीं किया। पीड़िता और उसके माता-पिता रिक्शे से बस अड्डे व फिर बस से बाराबंकी तक पहुंचे। इस दौरान उनके साथ कोई भी घटना हो सकती थी।
बच्ची के पिता ने कहा कि हमने अस्पताल प्रशासन को एंबुलेंस उपलब्ध कराने के लिए कहा था लेकिन नहीं दी गई। अस्पताल से किशोरी के मां-बाप उसको रिक्शे पर लेकर कैसरबाग बस अड्डे गये। वहां से बस पकड़कर बाराबंकी आए। यहां अपने एक रिश्तेदार के यहां जाकर अंधेरा होने का इंतजार किया उसके बाद शाम को रिश्तेेदार ने अपनी कार से गांव स्थित घर छोड़ा।
कार जब गांव में पीड़िता के घर सामने रुकी तो आसपास के लोगों को पता चल गया। एक दो लोग घर से कुछ दूरी पर मंडराने लगे लेकिन कोई पास नहीं आया। डरा-सहमा परिवार गाड़ी से उतरा और बोझिल कदमों से घर के अंदर चला गया। पीड़िता के पिता ने कहा कि अभी मेेरी बेटी खुद बच्ची है। ऐसे में नन्हें बच्चे का पोषण कर पाना संभव नहीं है। नवजात लखनऊ के अस्पताल में ही है।