बाराबंकी/जैदपुर। करीब पांच हजार वर्षों के इतिहास को समेटे हथकरघा उद्योग को संजोने एवं बुनकरों को सम्मान देने के लिए सात अगस्त 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुरुआत की थी। हथकरघा उद्योग को बढ़ाने के लिए योजनाएं तो तमाम शुरू की गईं, लेकिन कम उत्पादन, अधिक लागत व मेहनत के कारण आज हथकरघा उद्योग की चमक फीकी पड़ गई है। विद्युत चालित पावरलूम मशीनें आज हथकरघा का बेहतर विकल्प बन चुकी हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षाें में जिले में हथकरघा बुनकरों की संख्या करीब 700 सिमटकर रह गई है।
हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बाराबंकी में तैयार होने वाले स्टोल को एक जनपद एक उत्पाद के रूप में चयनित किया गया था। एक समय में जैदपुर, रामपुर, सआदतगंज, सहाबपुर, सैदनपुर में बड़े पैमाने पर बुनकर हथकरघा से बुनाई करते थे। इस उद्योग से करीब पांच हजार परिवार जुड़े हुए थे। सऊदी अरब, कतर, दुबई, बहरीन समेत कई देशों में कपड़ा जाता था। हथकरघा से कपड़े बुनने के लिए एक मुख्य बुनकर के साथ कम से कम दो-तीन अन्य सहयोगियों की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में अब हथकरघा छोड़कर बुनकर पावरलूम को तरजीह दे रहे हैं।
वर्तमान में करीब 700 परिवार हथकरघा चला रहे हैं। इनमें अधिकांश वही हैं जो पावरलूम मशीन लगाने के लिए रुपये नहीं जुटा पा रहे हैं। जैदपुर के मोहल्ला बड़ापुरा में हथकरघा बुनकर जमीला खातून बताती हैं कि हथकरघा से पूरे दिन में मात्र 250 से 300 रुपये की आय मुश्किल से हो पाती है।
यह चल रही हैं योजनाएं
हथकरघा बुनकरों को आवास बनाने के लिए 1.20 लाख रुपये मदद मिलती है। हथकरघा लगाने के लिए 22500 रुपये की मदद, बुनकर कार्यशाला में प्रशिक्षण लेने पर मानदेय, पंजीकृत बुनकरों को प्रति माह 328 रुपये की सब्सिडी, बच्चों को हाईस्कूल के आगे की पढ़ाई के लिए दो से लेकर चार लाख रुपये की मदद की जाती है।
सरकार करे बुनकरों की मदद
मुख्यमंत्री व राज्यपाल से सम्मानित बुनकर जफर अंसारी ने कहा कि हथकरघा से बुनाई करने वाले बुनकरों को बुनाई महंगी मिलनी चाहिए। हथकरघा की ओर से बनाए गए स्टाेल और कपड़े पर सरकार सब्सिडी मुहैया कराए। बिना सरकारी मदद के हथकरघा बुनकरों की स्थिति में सुधार नहीं होगा। स्टोल व्यापारी अफरोज अंसारी ने बताया कि 10 वर्ष पहले हथकरघा चलाने वाले बुनकरों की संख्या हजारों में थी। अधिकांश स्टोल इन्हीं बुनकरों की ओर से तैयार किए जाते थे, लेकिन अब हथकरघा से स्टोल बनाने वाले बुनकरों की संख्या काफी कम है।