बाराबंकी। जिला महिला अस्पताल में महज तीन महिला सर्जन चिकित्सकों की तैनाती है। या यूं कहा जाए कि जच्चा-बच्चा की जान बचाने का जिम्मा सिर्फ इन्हीं तीन महिला चिकित्सकों पर हैं। इसके अलावा ईएमओ, पैथालॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट के पद भी खाली पड़े हैं। इन सबके बावजूद यहां पर आने वाली प्रसूताओं को बेहतर उपचार की सुविधा देने का दावा किया जा रहा है, लेकिन शासन ने बैठे जिम्मेदार इस समस्या का हल नहीं निकाल पा रहे हैं।
जिला महिला अस्पताल में चिकित्सकों के 28 पद स्वीकृत हैं, इसके सापेक्ष महज 13 डॉक्टर ही तैनात हैं। इनमें तीन महिला सर्जन चिकित्सक हैं। जबकि इसके लिए पांच पद स्वीकृत हैं। ईएमओ के 10 पद हैं और सभी 10 खाली पड़े हुए हैं। इसी प्रकार पैथालॉजिस्ट के दो पद हैं और दोनों खाली हैं। रेडियोलॉजिस्ट के दो पद हैं और एक खाली है। बेहोशी के पांच डॉक्टर होने चाहिए, जबकि दो डॉक्टरों से काम चलाया जा रहा है। देखा जाए तो महिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिमाह करीब नौ हजार महिला देखी जाती हैं इनमें से करीब 500 महिलाएं ऐसी हैं, जिनका सामान्य प्रसव होता है, वहीं 150 से 200 प्रसव ऑपरेशन के जरिए कराए जाते हैं। चिकित्सकों की यह कमी लंबे समय से चली आ रही है। शासन में बैठे जिम्मेदार दावे तरह-तरह के रहे हैं, मगर इस गंभीर समस्या का हल नहीं निकाल पा रहे हैं।
जिला महिला अस्पताल की ओपीडी एक माह में नौ हजार के आसपास पहुंच गई है। इससे साफ है कि यहां पर प्रसूताओं को बेहतर उपचार की सुविधा मिल रही है और इसका पूरा प्रयास भी किया जाता है कि अस्पताल में आने वाली प्रसूताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। चिकित्सकों की कमी के संबंध में शासन को पत्र के माध्यम से अवगत कराया जा चुका है।
डॉ. प्रदीप कुमार, सीएमएस जिला महिला अस्पताल