घाघरा नदी द्वारा खेतों की कटान किए जाने बाढ़ पीड़ितों की रातों की नींद गायब हो रही है। क्योंकि नदी जिन खेतों को काट रही है उन खेतों में बाढ़ पीड़ितों की फसल लगी हुई है। इसके अलावा नदी का पानी एल्गिन चरसड़ी तटबंध को बराबर काट रहा है।
वहीं नदी का पानी खतरे कि निशान से अभी भी 30 सेमी ऊपर बह रहा है। जिन गांवों में नदी का पानी भरा हुआ है वहां के लोग समस्याओं से जूझ रहे हैं।
घाघरा नदी का पानी करौनी गांव के निकट बाढ़ पीड़ितों के खेतों में लगी गन्ने आदि की फसल को काट रही है। शनिवार से नदी ने खेताें की ओर रुख किया है इससे बाढ़ पीड़ित किसानों की रातों की नींद गायब हो गई है। क्योंकि बाढ़ पीड़ितों की आय का एक मात्र स्रोत गन्ने की खेती है।
धान की फसल वैसे भी बाढ़ पीड़ित बहुत कम लेते हैं। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि खेतों की लगी गन्ने की फसल को नदी का पानी तेजी से काट रहा है जिससे हम लोग खासे परेशान हैं। यदि का पानी इसी तरह फसलों को काटता रहा तो हम लोग बर्बाद हो जाएंगे। क्योंकि हम लोगों की आय का एक मात्र साधन गन्ने की खेती ही होती है।
क्योंकि नदी के पानी से इस तरह की उम्मीद नहीं थी। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि नदी का पानी एल्गिन चरसड़ी तटबंध को लगातार काट रहा है अब तक बांध का करीब 8 सौ मीटर से ज्यादा हिस्सा नदी में समा चुका है। रविवार को नदी का पानी खतरे के निशान से 30 सेमी ऊपर बह रहा है।
बाढ़ में फंसे ग्रामीण बीमारी के चपेट में
बाढ़ पीड़ित गांव रायपुर मांझा, परसावल, नैपुरा, कमियार आदि गांवों के लोगों का कहना है कि गांव में पानी भर जाने के बाद कुछ लोग तो बंधे पर चले गए, लेकिन जो लोग गांव में फंसे हैं उनके सामने तमाम प्रकार की दिक्कतें पैदा होने लगी हैं। पानी भले की गांवों से कम हो रहा हो, लेकिन लोग सर्दी, जुकाम और बुखार की चपेट में आने लगे हैं।
नदी का पानी करौनी गांव के निकट खेतों में कटान करने की जानकारी मिली है। बाढ़ खंड के अधिकारियों को भेजा गया था, लेकिन जब तक नदी का पानी कम नहीं होता है तब तक तटबंध की मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो पाएगा। यदि अभी भी लोग गांवों में फंसे हैं तो उन्हें नावों के माध्यम से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाएगा। - हरिकेश चौरसिया, अपर जिलाधिकारी