बाराबंकी। जिज्ञासा... निरीक्षण... प्रयोग... समाधान। यही चार शब्द किसी साधारण विद्यार्थी को बाल वैज्ञानिक की कतार में खड़ा करते हैं। जब बच्चे अपने आसपास बिखरी छोटी-छोटी समस्याओं को वैज्ञानिक दृष्टि से देखना शुरू करते हैं तो बड़े से बड़े संकट की राह आसान हो जाती है। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का मूल मकसद भी बच्चों में छिपी इसी वैज्ञानिक चेतना को जगाना है।
सागर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में आयोजित जनपद स्तरीय माध्यमिक शिक्षा की शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला में शिक्षकों को इसी वैज्ञानिक दृष्टि को बच्चों तक पहुंचाने का प्रशिक्षण दिया गया। भारत सरकार के राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद की ओर से समर्थित इस कार्यक्रम का शुभारंभ बाल विज्ञान कांग्रेस के संरक्षक डॉ. विनय कुमार जैन ने किया। डा. जैन ने कहा कि जब विद्यार्थी किसी समस्या को देखकर वैज्ञानिक कार्यविधि के साथ चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ता है तो विज्ञान उसे कठिन नहीं बल्कि बेहद सहज और व्यावहारिक लगने लगता है।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने शिक्षकों को बच्चों से प्रोजेक्ट तैयार कराने के बारीक नुस्खे बताए। राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक दिनेश कुमार वर्मा ने इस वर्ष के मुख्य विषय सतत विकास के लिए विज्ञान एवं नवाचार के बारे में बताया। वहीं, रसायन विज्ञान के प्रवक्ता ताजुद्दीन खान ने खाद्य, कृषि और स्वास्थ्य से जुड़े उप-विषयों पर व्यावहारिक प्रोजेक्ट बनाने की जानकारी दी।
कार्यशाला में जिला विज्ञान क्लब के समन्वयक एवं एकेडमिक कोऑर्डिनेटर आशीष पाठक ने शिक्षकों से कहा कि प्रोजेक्ट के लिए बच्चों को किसी लैब की जरूरत नहीं है, बल्कि उनका अपना विद्यालय, गांव या मोहल्ला ही सबसे बड़ी प्रयोगशाला है। बच्चे सीधे प्रश्नावली और संवाद विधि का उपयोग कर आंकड़े जुटा सकते हैं। इस मौके पर चेयरपर्सन मधु अग्रवाल, मानस झुनझुनवाला व जिला समन्वयक अजय कुमार सहित 85 शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।
पर्यावरण का सुरक्षा चक्र, आर-फोर तकनीक
ऊर्जा संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सही संतुलन के लिए आर-फोर सिद्धांत बेहद कारगर माध्यम है। इसका अर्थ है रिड्यूस (उपयोग कम करना), रियूज (पुनः प्रयोग करना), रिसाइकल (पुनर्चक्रण करना) और रिकवर (ऊर्जा या सामग्री को पुनः प्राप्त करना)। इस विधि को अपनाकर बाल वैज्ञानिक अपने आसपास हो रही ऊर्जा की बर्बादी को रोक सकते हैं और सतत विकास के मॉडल तैयार कर सकते हैं। कचरा प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण के लिए आर-फाइव मॉडल को सबसे बेहतर माना गया है। इसमें आर-फोर के चारों नियमों के साथ पहला और सबसे जरूरी नियम जुड़ता है...रिफ्यूज यानी इस्तेमाल से साफ मना करना।