बाराबंकी। सोशल मीडिया का नियमित प्रयोग करने वाले आजकर अपनी या परिवार की घिबली पिक बना कर उसे सोशल मीडिया में शेयर कर रहे हैं। लोग अपने परिवार, दोस्त अथवा कार्यस्थल पर एआई के जरिए अपनी घिबली तस्वीर बना कर उसे पोस्ट करने के दौरान यह नहीं सोचते कि इससे वह अपनी खुद की निजता को खतरे में डाल रहे हैं। साइबर क्राइम से लोगों को जागरूक बनाने वाले कुछ पुलिस अधिकारी भी इसका प्रयोग करने में बढ़चढ़कर हिस्सेदारी करते दिखते हैं।
साइबर क्राइम सेल ने इसे लेकर अलर्ट जारी किया है। आशंका जताई है कि इससे डिजिटल क्राइम को बढ़ावा मिलेगा। सीओ साइबर क्राइम सौरभ श्रीवास्तव ने बताया कि जिस समय आप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग करके कोई तस्वीर बनाते है तो कुछ देर तक कैमरे की ओर देखना पड़ता है। ऐसे में यूजर की आंखों का विजुअल भी एआई संरक्षित कर लेता है। ऐसे में घिबली पिक का प्रयोग करने वालों को सावधानी के साथ संबंधित एप से जुड़ी शर्तें ध्यान से पढ़ लेना चाहिए।
बताया कि एआई या संबंधित एप को निजी डेटा प्रोसेस करने में आसानी मिलती है। साथ ही, यूजर तस्वीर को एआई पर शेयर कर उनके इस्तेमाल पर प्राइवेसी नहीं लगा सकते। इससे एआई उन तस्वीरों का प्रयोग करने के साथ ही पिक के जरिए नकली प्रोफाइल भी तैयार कर सकता है। एआई बिना अनुमति के ही यूजर की पिक कई उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल में ला सकता है।
साइबर थाने में काम कर रहे कांस्टेबल राजन यादव ने बताया कि डेटा का उपयोग डीपफेक, पहचान की चोरी, और अन्य साइबर अपराधों के लिए किया जा सकता है। घिबली फीचर में लोग अपनी निजी इंफॉर्मेशन और पिक्स को अपलोड करते हैं ऐसे में कोई भी साइबर अपराधी इस बात का फायदा उठा सकता है और उनका गलत इस्तेमाल कर सकता है। इसलिए इस फीचर या सोशल मीडिया के ट्रेंड से लोगों को पूरी तरह सतर्कता बरतने की जरूरत है।