घाघरा नदी का पानी तराई के दो गांवाें में घुस गया है। इससे गांवों में हड़कंप मच गया। इन गांवों के लोगों ने सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन भी शुरू कर दिया है। वहीं जानकारी के बाद पहुंच एडीएम ने तराई का भ्रमण किया।
लापरवाही पाए जाने पर एसडीओ बाढ़ को फटकार लगाते हुए ठोकर बनाए जाने के कार्य में तेजी लाने के आदेश दिए हैं। इस बीच घाघरा नदी का पानी जो सोमवार से बढ़ने लगा था मंगलवार को दोपहर के बाद स्थिर हो गया है।
नेपाल और तराई क्षेत्रों में हो रही बारिश केे पानी से घाघरा ने अपना तेवर बदलना शुरू कर दिया है। सोमवार रात नदी का पानी टिकैतनगर क्षेत्र में तराई के दो गांव परसावल और नैपुरा में घुस गया। नदी का पानी लोगों के घरों तक पहुंच गया है।
जिससे यहां के लोगों ने तटबंध पर शरण लेने के लिए परिवार के साथ गांव से पलायन शुरू कर दिया है। गांव के निवासी राजेन्द्र यादव, महेन्द्र यादव, उमानाथ, देवकी, शिवसरन कहते हैं कि सोमवार सुबह पानी गांव से करीब 15 मीटर दूर था। लेकिन रात में पानी गांव में घुस गया।
नदी का पानी जब भी बढ़ता है सबसे पहले परसावल और नैपुरा गांव को ही प्रभावित करता है। यहीं के रामप्रतापका कहना था कि नदी का पानी हम लोगाें के घरों में घुस गया है इसलिए खाने-पीने का सामान लेकर परिवार के साथ बंधे पर जा रहा हूं। अब पता नहीं, कितने दिनों तक परिवार के साथ बंधे पर रहना पड़े।
यहां के कुछ ग्रामीण अपने साथ मवेशी भी ले गए। कहा कि हम बंधे पर रहेंगे तो इनको दाना-पानी कौन देगा। इसलिए जब भी हम लोग बंधे पर रहने के लिए जाते हैं, अपने पशु साथ ले जाते हैं। गांवों में नदी का पानी पहुंचने की जानकारी मिलते ही दोपहर को अपर जिलाधिकारी हरिकेश चौरसिया, एसडीएम सिरौलीगौसपुर प्रभाकांत अवस्थी और एएसपी कुंवर ज्ञानंजय के साथ मौके पर पहुंच गए।
उन्होंने एसडीएम को निर्देश दिए कि पहले जिन लोगों के घरों तक पानी पहुंच गया है उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया जाए। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि इन लोगों को किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। वहीं गनेशपुर प्रतिनिधि के अनुसार घाघरा नदी का पानी सोमवार को बढ़ रहा था लेकिन मंगलवार को दोपहर के बाद स्थिर हो गया है।