शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाएं भरी पड़ी हैं। समय-समय पर जिले के खिलाड़ियों ने इसे साबित भी किया है। कई खिलाड़ियों ने संसाधनों के अभाव में जिले का नाम राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।
लेकिन यह भी सच है कि सही प्लेटफार्म नहीं मिलने के चलते कई प्रतिभाएं गांव व कस्बे तक ही सिमट कर दम तोड़ देती है। मंत्री व अधिकारी खेल को बढ़ावा देने की बातें तो बड़ी-बड़ी करते हैं पर सब भाषण तक सीमित रहता है।
जिले में खेल गतिविधियों के लिए जिला स्तर पर केडी सिंह बाबू स्टेडियम है। विकास खंड देवां, मसौली व त्रिवेदीगंज में मिनी स्टेडियम व 152 पायका खेल मैदान विकसित किए गए हैं।
माध्यमिक कॉलेजों में खेल मैदान हैं लेकिन इन पर खेल नहीं होते। इन उपेक्षाओं के बाद भी ग्राम हजरतपुर के अतुल वर्मा ने नानजिंग (चीन) में आयोजित यूथ ओलंपिक की तीरंदाजी प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर जिले का नाम रोशन कर चुके हैं।
अतुल ने अगस्त 2014 में चीन के ताइपे में आयोजित एशियन ग्रैंडशिप की तीरंदाजी प्रतियोगिता का सिल्वर जीत कर देश का तिरंगा लहराया था। खेल विभाग कर्मियों की मानें तो स्टेडियम के लिए कोई बजट नहीं आता है। मांग के आधार पर ही बजट मिलता है। स्टेडियम में निर्माण कार्य चल रहा है। मौजूदा समय में फायर टैंक बनाया जा रहा है।
खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने के लिए रेगुलर कोचिंग व कोच प्रशिक्षक का अभाव है। रेगुलर कोचिंग नहीं हो रही है। प्रशासनिक अधिकारी व नेता भी खेल गतिविधियों को लेकर गंभीर नहीं हैं। यह हालत तब है जबकि खेल राज्यमंत्री फरीद महफूज किदवई भी जिले से ही हैं।
कोई खास तैयारी नहीं
खेल दिवस के एक दिन पूर्व केडी सिंह बाबू स्टेडियम में कोई खास तैयारी नहीं दिखी। चौकीदार के सिवा कोई कर्मचारी व अधिकारी नहीं दिखाई दिए। चौकीदार हजारीलाल ने बताया कि मैदान की घास काटी गई है तथा चूना डाल कर हाकी खेलने के लिए मैदान तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा स्टेडियम में बॉलीवॉल कोर्ट बनाए जाने की तैयारी है। साथ ही निर्माण कार्य भी चल रहा है।
नहीं मिलती कोई सुविधा
जिले से राष्ट्रीय चैंयिनशिप की संतोष ट्राफी खेलने वाले एक मात्र फुटबालर सज्जाद हुसैन शासन व प्रशासन की उपेक्षा से आहत हैं। बताया कि प्रदेश में रणजी ट्राफी खेलने वाले खिलाड़ी को संघ से धनराशि व पेंशन की सुविधा दी जाती है।
लेकिन संतोष ट्रॉफी खेलने के बाद भी कोई सरकारी सुविधा नहीं मिली। बताया कि अब तक 18 राज्यों में खेल चुके हैं। पास आय को कोई स्रोत नहीं है।
ताइक्वांडो के खिलाड़ी अनिल धानुक भी अधिकारियों की उपेक्षा से आहत हैं वह बताते हैं कि उन्होंने वर्ष 2010 में विशाखापत्तम में हुई अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में भाग लिया था। इसके बाद भी प्रशासन, शासन स्तर से कोई सुविधा नहीं मिल रही है।
प्राइवेट स्कूल में प्रशिक्षण से ही थोड़ी बहुत आय हो जाती है। हाल में ही सेठ एमआर जयपुरिया के बच्चों को प्रशिक्षित किया, जिसके बाद 44 बच्चों ने बेल्ट प्रमोशन परीक्षा उत्तीर्ण की।