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Barabanki News: डाॅक्टरों की भाषा ऐसी, फार्मासिस्ट पढ़ पाए न मरीज

Sun, 12 Apr 2026 12:43 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
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बाराबंकी। सरकारी अस्पताल के टेढ़ी-मेढ़ी लाइनों का परचा वायरल होने के बाद शनिवार को जिला अस्पताल की पड़ताल की गई। डॉक्टरों को दिखा कर निकले मरीजों के परचे की भाषा को परखा गया तो किसी की भाषा समझ से परे दिखी तो किसी ने सही शब्दों में दवाएं लिखी थीं। फार्मासिस्ट भी परचे पर टेढ़ी-मेढ़ी लाइनों काे समझने में उलझ जा रहे हैं।
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जिला अस्पताल में दवा लेने आई संजू देवी ने बताया कि सीने में दर्द पर फिजीशियन को दिखाया गया। उन्होंने परचे पर चार दवाएं लिख ईसीजी कराने की सलाह दी। यह परचा डॉ. राजेश कुशवाहा का था, जिनका परचा दो दिन पहले वायरल हुआ था। शनिवार को इनके द्वारा कई मरीज देखे गए लेकिन इनके भाषा में कोई विशेष सुधार नहीं दिखा। वहीं बुखार से पीड़ित मनोज कुमार के परचे पर जो दवाएं लिखी थी उनकी भाषा सही थी और वह पढ़ने में भी आ रही थी। एक फार्मासिस्ट ने बताया कि परचे पर लिखी लाइनों काे समझने के लिए कई बार गूगल करना पड़ता है। इसके बाद भी समझना व मरीजाें को समझाना कठिन हो जाता है।
इसके अलावा कई अन्य चिकित्सक मरीजों को दवा लिखने में काफी सतर्कता बरत रहे थे। एक दो मरीजों ने कहा भी कि डॉक्टर साहब बाहर की दवाएं लिख दीजिए लेकिन आम दिनों में बाहर की दवाएं लिखने में ज्यादा रूचि दिखाने वाले डॉक्टर शनिवार को इससे बचते नजर आए। लोगों ने बताया कि टेढ़ी-मेढ़ी लाइनों का परचा वायरल होने के बाद से अस्पताल में चिकित्सक काफी सतर्कता बरत रहे थे।
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बुखार और खांसी के मरीज रहे ज्यादा
जिला अस्पताल की ओपीडी में शनिवार को 1227 मरीज देखे गए। इस दौरान सर्दी, जुकाम, बुखार और खांसी के 327, हड्डी रोग के 291, बदन दर्द के 217, त्वचा रोग के 319 मरीज देखे गए। इस दौरान इलाज के लिए रामबहादुर, संतकुमार, संगीता ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से बुखार के साथ खांसी आ रही है। गनीमत रही कि अन्य दिनों की अपेक्षा भीड़ कम होने की वजह से डॉक्टर को दिखाने में अधिक दिक्कत नहीं हुई।
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