लखनऊ। सुर-ताल और साधना की वर्षों की तपस्या को बुधवार को सम्मान का मंच मिला। कैसरबाग स्थित कलामंडपम प्रेक्षागृह में आयोजित भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के 16वें दीक्षांत समारोह में 48 मेधावियों को सम्मानित किया गया। कुल 255 पदकों के वितरण के बीच एमपीए (कथक) की छात्रा श्वेता गुप्ता ने सात स्वर्ण पदक जीते। समारोह में भारतीय संगीत और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ाने का संदेश भी दिया गया।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के प्रतिनिधि व विशेष कार्याधिकारी सुधीर एम. बोबडे ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता संगीत तैयार कर सकती है, लेकिन इसकी आत्मा मानवीय संवेदना, साधना और अनुभव से ही जन्म लेती है। मुख्य अतिथि पद्मश्री पंडित कुमार बोस ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की आत्मा को नव रसों से जोड़ते हुए साधना और संवेदना का महत्व बताया।
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि दिए गए पदकों में से 28 छात्राओं को मिले हैं, जो महिला सशक्तीकरण का उदाहरण है। उन्होंने युवाओं से नेशन फर्स्ट की भावना के साथ विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
इन्हें किया गया सम्मानित : समारोह में स्पर्श कुमार कश्यप (तीन स्वर्ण, एक कांस्य), नेहा काजी (पांच स्वर्ण), प्रिया दुबे (चार पुरस्कार), आलोक कुमार मिश्रा (चार पदक), दीप्ति सिंह (तीन स्वर्ण), रुनझुन सिंह, वल्लरी नारायण पाठक, तनिष्का सक्सेना, विकास अवस्थी, संध्या पचौरिया सहित कई विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। नाट्यकला की छात्रा करतुम्म तरैया को पद्मश्री प्रो. राज बिसारिया स्वर्ण पदक दिया गया। विवि की पत्रिका और प्रो. सृष्टि माथुर की पुस्तक ‘संगीत सृष्टि’का विमोचन भी हुआ। कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने बताया कि इस वर्ष पहली बार विश्वविद्यालय के तीन विद्यार्थियों का जेआरएफ में पंजीकरण हुआ है, जो संस्थान की बढ़ती शैक्षणिक उपलब्धि का संकेत है।
कथक की साधना ने दिलाए सात पदक : दीक्षांत समारोह में कथक की छात्रा श्वेता गुप्ता ने सर्वाधिक सात पदक जीतकर सबका ध्यान खींचा। कभी नृत्य को कॅरिअर बनाने का विरोध करने वाले रिश्तेदार आज उनकी सफलता पर गर्व महसूस कर रहे हैं। बीए के बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह कथक को समर्पित कर दिया। गुरु डॉ. रुचि खरे के मार्गदर्शन में मंचीय प्रस्तुति के साथ शास्त्रीय ज्ञान पर भी बराबर मेहनत की। अब श्वेता की इच्छा इसी विश्वविद्यालय में अध्यापन कर नई पीढ़ी के कलाकार तैयार करने की है।
बंद कमरे में गिटार पर रियाज, जीते पांच मेडल : एमपीए (हवाइयन गिटार) की छात्रा नेहा काजी ने कठिन हालात को अपनी ताकत बना लिया। बचपन में मां को खोने के बाद जिम्मेदारियां संभालीं और सामाजिक व मजहबी बंदिशों के बीच दोस्तों के घर और विश्वविद्यालय में घंटों रियाज किया। नेहा पूरे बैच की अकेली छात्रा रहीं और शारीरिक कठिनाइयों के बावजूद हार नहीं मानी। पिता के सहयोग और लगन से उन्होंने पांच स्वर्ण पदक जीतकर हवाइयन गिटार में विश्वविद्यालय की पहली महिला मेडल विजेता बनने का गौरव हासिल किया।
संगीत की विरासत को मेहनत से दिया नया मुकाम : आजमगढ़ के मशहूर हरिहरपुर संगीत घराने से जुड़े आलोक मिश्रा ने पारिवारिक विरासत को कठिन साधना से नई ऊंचाई दी। बनारस और लखनऊ में रहकर वर्षों तक तबले का नियमित रियाज किया। उनकी मेहनत का परिणाम दीक्षांत समारोह में चार मेडल (3 स्वर्ण, 01 कांस्य) के रूप में सामने आया। आलोक का सपना भारतीय तबला परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाना और अपनी कला से देश का नाम रोशन करना है।
ट्यूशन पढ़ाकर पूरी की पढ़ाई, सुरों ने दिलाए चार मेडल : रिटायर्ड फौजी परिवार से आने वाले स्पर्श कुमार कश्यप के घर में संगीत का माहौल नहीं था। शुरुआती सहयोग न मिलने पर उन्होंने पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए ट्यूशन पढ़ाया। उनकी मेहनत रंग लाई और गायन विभाग में चार मेडल (3 स्वर्ण, 01 कांस्य) हासिल किए। अब स्पर्श संगीत में पीएचडी कर अध्यापन के क्षेत्र में जाना चाहते हैं, ताकि नई पीढ़ी को शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा से जोड़ सकें।
नौकरी, परिवार और शोध के संतुलन के साथ बने मिसाल : डॉ. विकास अवस्थी को भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय से तबला वादन में पीएचडी की उपाधि मिली है। उनका शोध ‘तबले में विस्तारशील एवं अविस्तारशील रचनाओं की तुलना : पूरब बाज के संदर्भ में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन’ भारतीय शास्त्रीय संगीत के लिए महत्वपूर्ण है। उप्र विधानसभा में समीक्षा अधिकारी का दायित्व निभाने के साथ उन्होंने शोध और पारिवारिक जिम्मेदारियों का सफल संतुलन बनाया। उन्होंने बताया कि पत्नी अंबिका अवस्थी और परिवार के सहयोग से यह सफलता मिली है।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।
भातखंडे विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान हुआ।