बाराबंकी। नगर पालिका परिषद नवाबगंज समेत 14 निकायों में आज शपथ ग्रहण के साथ अध्यक्षों एवं सदस्यों की जिम्मेदारी तय हो जाएगी। चुनाव के दौरान नगरीय क्षेत्रों के समग्र विकास के वादे कर चुनाव जीतने वाले जनप्रतिनिधियों के आगे विकास की कसौटी पर खरा उतरना आसान नहीं होगा। अधिकांश निकायों की हालत खस्ताहाल है। कई जगह अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त होने के बाद विकास के नाम पर एक ईंट भी नहीं रखी गई है। ठेकेदारों व कर्मचारियों को करोड़ों का भुगतान किया जाना है। इसके साथ ही निकायों की आय बढ़ाना भी बड़ी चुनौती है।
बात अगर नगर पालिका परिषद नवाबगंज की करें तो यहां का आय-व्यय बजट करीब 35 करोड़ रुपये का है। वर्तमान में नगर पालिका की वार्षिक आय 10 करोड़ रुपये के आसपास है, जबकि पांच करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज भी है। पूर्व में कराए गए विकास कार्यों के साथ कर्मचारियों को यह भुगतान किया जाना है। ऐसे में पहली बैठक में अध्यक्ष के सामने वार्षिक कार्ययोजना में इन सभी पहलुुओं पर विचार करने की भी चुनौती होगी।
इसके अलावा बाराबंकी शहर के अनियोजित विकास को रोकने, जलनिकासी की समस्या से उबारने, मुख्य बाजार से लेकर पूरे शहर में पार्किंग, महिलाओं के लिए शौचालय जैसी समस्याएं भी कतार में हैं। जमुरिया नाले के पास हरित पट्टी में बसे लोगों को विस्थापित करना भी आसान नहीं होगा। सीमा विस्तार में नगर पालिका में शामिल हुए तमाम इलाकों में मूलभूत सुविधाओं का संकट है। नई आबादी में पेयजल का संकट भी बना हुआ है। नगर पंचायत हैदरगढ़, सुबेहा व सिद्धौर में पिछले कई माह से विकास कार्य पूरी तरह से ठप पड़े हैं।
जलनिकासी, सड़क, कूड़ा निस्तारण जैसे छोटी-छोटी जरूरतें भी नहीं पूरी हो पा रही हैं। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र देवा में यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखने हुए विकास के पथ पर ले जाना होगा। नगर पंचायत जैदपुर, सतरिख, फतेहपुर, बेलहरा, दरियाबाद, बंकी, टिकैतनगर और रामनगर में जलापूर्ति, सफाई व्यवस्था, फॉगिंग, जलनिकासी की समस्याएं प्रमुख हैं। इन सभी निकायों पर कर्मचारियों से लेकर ठेकेदारों का भुगतान बकाया है।
पहले अध्यक्ष के सामने कई चुनौतियां
करीब दो वर्ष पूर्व नवगठित नगर पंचायत रामनगर में पहली बार अध्यक्ष व सदस्यों का चुनाव हुआ। अध्यक्ष पद पर डॉ. ज्ञान प्रकाश यादव विकास के मुद्दे पर निर्दलीय चुनाव लड़े और भाजपा-सपा समेत 15 प्रत्याशियों को शिकस्त देकर चुनाव जीते हैं। ग्रामीण परिवेश से उबारकर रामसनेहीघाट को शहरी क्षेत्र के रूप में विकसित करने की बड़ी चुनौती है।