बाराबंकी। रेल हादसों को रोकने के लिए अब जिले के बुढ़वल रेलवे स्टेशन से सीतापुर सिटी जंक्शन तक को तकनीक का सुरक्षा कवच मिलने जा रहा है। करीब 90 किलोमीटर लंबे इस रेल मार्ग पर 100 करोड़ रुपये से स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (कवच) लगाने का काम शुरू हो गया है। इसमें करीब 30 किमी रेल मार्ग बाराबंकी जिले में है।
कवच देश में विकसित स्वदेशी ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली है। अगर एक ही पटरी पर आमने-सामने से दो ट्रेनें आ रही हों, तो यह टकराने से पहले ही ट्रेनों में ऑटोमैटिक ब्रेक लगा देगा। अगर ट्रेन के लोको पायलट किसी वजह से लाल सिग्नल नहीं देख पाते और ट्रेन आगे बढ़ा देते हैं तो कवच खुद ही ब्रेक लगा देता है।
अगर मोड़ या खराब मौसम में ट्रेन की स्पीड तय सीमा से ज्यादा होती है, तो यह अपने आप स्पीड कम कर देता है। कोहरे में ट्रेन के अंदर ही सिग्नल की साफ जानकारी दिखा देगा। अब बुढ़वल-सीतापुर के रेलखंड पर जननायक एक्सप्रेस, गोंडा सीतापुर कैंट पैसेंजर, सहरसा अमृतसर जन एक्सप्रेस, अमृत भारत एक्सप्रेस, लखीमपुर सीतापुर पैसेंजर स्पेशल, छपरा अमृतसर एक्सप्रेस, सत्याग्रह एक्सप्रेस, गोरखपुर पुरानी दिल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें फर्राटा भरेंगी।
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ऐसे काम करता है कवच
ट्रेन के इंजन में लगा कंप्यूटर, रेलवे स्टेशन पर लगा सिस्टम व पटरियों पर जगह-जगह लगे छोटे डिवाइस... ये तीनों मिलकर हर सेकंड ट्रेन की सही लोकेशन और स्पीड पर नजर रखते हैं। जैसे ही कोई खतरा दिखता है, यह सिस्टम स्वयं ट्रेन को सुरक्षित रोक देता है।
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वर्जन
लखनऊ मंडल में डीआरएम गौरव अग्रवाल के नेतृत्व में कवच प्रणाली का काम कराया जा रहा है। वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर वैभव श्रीवास्तव इसकी देखरेख कर रहे हैं।
- सुमित कुमार, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी